चित्तौड़गढ़ जिले में एनडीपीएस मामलों में जब्त 31 वाहनों का निंबाहेड़ा के वंडर टाउन हॉल में खुली बोली से निस्तारण किया गया, जिससे करीब 31.07 लाख रुपये की राजस्व आय हुई।

चित्तौड़गढ़ जिले के विभिन्न पुलिस थानों द्वारा एनडीपीएस एक्ट के तहत मादक पदार्थों की तस्करी में जब्त किए गए 31 वाहनों का मंगलवार को निंबाहेड़ा स्थित वंडर टाउन हॉल में जिला स्तरीय औषधि व्यसन समिति द्वारा खुली बोली लगवाकर नीलामी के जरिए निस्तारण किया गया। भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन तथा पुलिस मुख्यालय राजस्थान के निर्देशों की अनुपालना में आयोजित इस नीलामी प्रक्रिया के दौरान कुल 10 दोपहिया, 15 चौपहिया और 6 भारी वाहनों की बोली लगाई गई। इस नीलामी से सरकार को करीब 31 लाख 7 हजार 500 रुपये की राजस्व आय प्राप्त हुई।

पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि चित्तौड़गढ़ जिला अफीम का एक बृहद उत्पादन क्षेत्र है और राज्य की सीमा से सटा हुआ है। इसी वजह से मादक पदार्थों की तस्करी प्रायः इसी रूट से होती है, जिसके चलते जिले के कई थानों में तस्करी में लिप्त वाहनों को माल के साथ जब्त किया गया था। लंबे समय से जब्त इन वाहनों की वजह से थानों के मालखाने पूरी तरह भरे पड़े थे और अन्य वाहनों को रखने के लिए स्थान उपलब्ध नहीं हो पा रहा था, जिसके कारण नियमानुसार इनका निस्तारण किया जाना आवश्यक था।

प्रक्रिया के तहत एनडीपीएस एक्ट के उन प्रकरणों के वाहनों को शामिल किया गया जिनका न्यायालय द्वारा अंतिम निर्णय हो चुका था अथवा जिनका भौतिक सत्यापन पूर्ण किया जा चुका था। ऐसे वाहनों के प्रस्ताव पुलिस थानों से मंगवाकर कार्यालय के एएसआई मनोज कुमार व स्टाफ, एएसआई सत्यनारायण एवं लेखा शाखा के कर्मचारियों द्वारा खुली बोली की प्रक्रिया संपन्न कराई गई।

वाहनों के निस्तारण हेतु पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई थी। इस समिति में एएसपी गजेंद्र सिंह जोधा, अपराध सहायक जोधाराम गुर्जर, उप कोषाधिकारी कैलाश भराडिया, कनिष्ठ लेखा अधिकारी तथा परिवहन निरीक्षक हरगोविंद गुर्जर उपस्थित रहे, जिनकी देखरेख में पारदर्शी तरीके से बोली लगाई गई।

इस नीलामी में चित्तौड़गढ़ जिले के स्थानीय खरीदारों के अलावा उदयपुर, भीलवाड़ा, जोधपुर, कोटा तथा पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश से भी बड़ी संख्या में बोलीदाता शामिल हुए। मंगलवार को वंडर टाउन हॉल में आयोजित इस प्रक्रिया में सभी 31 वाहनों को उच्चतम बोलीदाताओं द्वारा स्वीकार किया गया, जिसके बाद सफल बोलीदाताओं को अग्रिम प्रशासनिक कार्रवाई के लिए आवश्यक निर्देश जारी कर दिए गए।

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