तस्वीर में भूपालसागर गौशाला में वैदिक विधि-विधान के तहत सामूहिक श्रावणी उपाकर्म अनुष्ठान के दौरान यज्ञोपवीत धारण और मंत्रोच्चार करते हुए साधक दिखाई दे रहे हैं।

भूपालसागर गौशाला में गौ माता के मध्य हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी परमपिता परमेश्वर की कृपा, गौ माता और गुरुदेव के आशीर्वाद से सामूहिक श्रावणी उपाकर्म का आयोजन वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार की ध्वनि के साथ संपन्न हुआ। पिछले चार वर्षों से आयोजित हो रहे इस उपाकर्म में बड़ी संख्या में वैदिक विद्वानों और सनातन धर्मावलंबियों ने भाग लिया।

अनुष्ठान की शुरुआत हेमाद्रि संकल्प से हुई। इसके बाद दस विधि सामग्री से सभी का स्नान संपन्न कराया गया। साधकों ने वर्षभर में जाने-अनजाने हुए ज्ञात-अज्ञात दोषों के प्रायश्चित और आत्मशुद्धि का संकल्प लिया। गौ माता के मध्य गौ भूमि पर मंत्रोच्चार के साथ विभिन्न वैदिक विधियां संपन्न कराई गईं।

इसके अगले चरण में सप्त ऋषि आवाहन, ऋषि पूजन, देव तर्पण, ऋषि तर्पण और पितृ तर्पण किया गया। इसके बाद संध्या विधि, गायत्री जप और नवीन यज्ञोपवीत पूजन-धारण विधि संपन्न हुई। विष्णु पूजन के साथ हवन कर्म पूर्ण किया गया। रक्षा सूत्र पूजन के बाद सभी ने एक-दूसरे को रक्षा सूत्र बांधा।

आचार्य पं. कृष्ण गोपाल सुखवाल ने बताया कि श्रावणी उपाकर्म का धार्मिक और वैदिक महत्व है। इसका उद्देश्य वेदाध्ययन की नई शुरुआत करना है। इसके साथ स्वाध्याय और धर्माचरण को दृढ़ करने का संकल्प लिया गया।

आयोजन के दौरान गौ माता का पूजन किया गया और गौ माता को भोग लगाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया गया। इस अवसर पर सभी विप्रों ने ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद के मंत्रों का वाचन कर जनकल्याण की प्रार्थना की।

आयोजन में आचार्य पं. कृष्ण गोपाल सुखवाल, देवीलाल पारीक, गोविन्द पालीवाल, मनोज भारद्वाज, धर्मराज शर्मा, ऋतिक शर्मा, विकाश उपाध्याय, चुनीलाल मेनारिया, राहुल खंडेलवाल, गोविंद सुखवाल, तरुण सुखवाल, भावेश शर्मा, महावीर जोशी, कमल पालीवाल, कुलदीप शर्मा सहित कई वैदिक विद्वान और बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी शामिल हुए।

श्रावणी उपाकर्म के माध्यम से साधकों ने वैदिक परंपरा के अनुसार वर्षभर के ज्ञात-अज्ञात दोषों के प्रायश्चित, आत्मशुद्धि, स्वाध्याय और धर्माचरण को दृढ़ करने का संकल्प लिया।

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