तस्वीर में बड़ीसादड़ी में आयोजित भूमि पूजन समारोह के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना करते हुए समाज के वरिष्ठजन और गणमान्य नागरिक नजर आ रहे हैं।

बड़ीसादड़ी में समाज के गरीब एवं जरूरतमंद विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य को ध्यान में रखते हुए संत शिरोमणि अमरा भगत छात्रावास तथा लोकमाता अहिल्याबाई पुस्तकालय एवं स्मारक के निर्माण कार्य का शुक्रवार को भूमि पूजन के साथ विधिवत शुभारंभ किया गया। अखिल भारतीय धनगर गायरी समाज एवं पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई सेवा संस्थान, बड़ीसादड़ी के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में पूजा-अर्चना और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ।

भूमि पूजन कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजन, पदाधिकारी, समाजबंधु एवं विभिन्न क्षेत्रों से आए गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वक्ताओं ने कहा कि यह निर्माण कार्य समाज में शिक्षा, संस्कार और सांस्कृतिक चेतना को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण प्रयास है।

वक्ताओं ने बताया कि संत शिरोमणि अमरा भगत छात्रावास के निर्माण से आर्थिक रूप से कमजोर एवं ग्रामीण अंचल के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने के लिए बेहतर आवासीय सुविधा उपलब्ध होगी। इससे समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ेगा, अधिक से अधिक विद्यार्थी उच्च शिक्षा की ओर अग्रसर होंगे तथा आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने का सशक्त अवसर मिलेगा।

निर्माणाधीन अहिल्याबाई पुस्तकालय विद्यार्थियों एवं युवाओं के लिए ज्ञान का केंद्र बनेगा। यहां विभिन्न विषयों की पुस्तकों के साथ लोकमाता अहिल्याबाई के जीवन, उनके आदर्शों, सुशासन, लोककल्याण एवं धर्मरक्षा से जुड़े साहित्य का भी विशेष संग्रह रहेगा।

वहीं लोकमाता अहिल्याबाई स्मारक में उनके जीवन के प्रेरणादायी प्रसंग, सनातन धर्म के संरक्षण एवं संवर्धन में उनके अतुलनीय योगदान तथा देशभर में उनके द्वारा करवाए गए मंदिरों, घाटों, धर्मशालाओं एवं जनकल्याणकारी कार्यों को चित्रों एवं अन्य माध्यमों से प्रदर्शित किया जाएगा। इससे लोकमाता अहिल्याबाई के आदर्शों एवं उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों को जन-जन तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी तथा समाज की नई पीढ़ी उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र एवं समाज सेवा के लिए आगे बढ़ेगी।

इस पुनीत एवं जनहितकारी कार्य के लिए समाज के अनेक भामाशाहों ने आगे आकर उदार मन से सहयोग की घोषणा की। छोगालाल गायरी (सेवानिवृत्त अध्यापक, बोरखेड़ा) ने ₹4,51,111, लालूराम जी साटोला ने ₹2,21,111, घासीलाल जी पटेल (सरथला) ने ₹1,00,000, कालूराम जी गायरी (अदमाजाजी बावजी का खेड़ा) ने ₹51,000, मोहनलाल जी पिता सुखलाल जी (बोरखेड़ा) ने ₹51,000 तथा अमरचंद जी गायरी (बोरखेड़ा) ने ₹11,000 की सहयोग राशि देने की घोषणा की।

इसके अलावा गणेश जी पिता श्री भेरूलाल जी गूंजोल (जिलाध्यक्ष, गायरी समाज राजसमंद) ने निर्माण कार्य के लिए 11 डंपर रेती, उदयलाल जी एवं शंकरलाल जी (बोरखेड़ा) ने 10 ट्रिप पत्थर तथा सत्यनारायण जी (भोपतपुरा) ने 50 कट्टा सीमेंट उपलब्ध कराने की घोषणा की। समाजजनों ने सभी भामाशाहों का अभिनंदन करते हुए उनके सहयोग को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

कार्यक्रम में उपस्थित समाजबंधुओं ने इस परियोजना को शिक्षा, संस्कृति एवं सामाजिक उत्थान का आधार बताते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति से निर्माण कार्य में सहयोग देने का आह्वान किया। वक्ताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सामूहिक सहयोग से यह परिसर भविष्य में शिक्षा, संस्कार, शोध, संस्कृति एवं सामाजिक चेतना का प्रमुख केंद्र बनेगा।

भूमि पूजन के साथ निर्माण कार्य विधिवत प्रारंभ हुआ। उपस्थित सभी लोगों ने इसे गायरी समाज के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए इस जनकल्याणकारी अभियान को सफल बनाने का संकल्प लिया।

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