तस्वीर में संत दिग्विजयराम महाराज चित्तौड़गढ़ रामद्वारा में शिव महापुराण कथा के दौरान मंच पर माइक के सामने बैठकर सत्संग देते हुए नजर आ रहे हैं।

मनुष्य को अपने जीवन में नियम जरूर रखना चाहिए। बिना नियम का जीवन पशु समान होता है। प्रतिदिन अपने इष्ट की आराधना किए बिना अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। यह बात चित्तौड़गढ़ रामद्वारा में चातुर्मासिक सत्संग के तहत आयोजित शिव महापुराण कथा वाचन में संत दिग्विजयराम महाराज ने कही।

संत दिग्विजयराम महाराज ने कहा कि शिव पुराण की विदेश्वर संहिता में बताया गया है कि कोई व्यक्ति जाने या अनजाने में अग्नि में पैर डालता है तो उसका जलना तय है। अनजाने में अमृत पीने पर अमरता प्राप्त होना तय है, जबकि अनजाने में जहर पीने पर मृत्यु निश्चित है। इसी प्रकार जाने-अनजाने में पारस पत्थर से लोहे का स्पर्श हो जाए तो लोहे का सोना बनना तय है, क्योंकि कोई भी वस्तु अपना स्वभाव नहीं छोड़ती। इसी तरह भगवान का नाम जानकर लें या अनजाने में, उद्धार होना तय है।

उन्होंने कहा कि त्रिपुण्ड की निंदा करना भगवान महादेव की निंदा करने के समान है। ऐसा करने वाला व्यक्ति पाप का भागी होता है। हर गांव में शिवालय जरूर होना चाहिए। शिव पुराण में चंदन और भस्म मिश्रित त्रिपुण्ड लगाने का विधान बताया गया है। भस्म स्नान करने से तीर्थ के समान फल की प्राप्ति होती है।



 


संत दिग्विजयराम महाराज ने बताया कि त्रिपुण्ड में तीन रेखाएं होती हैं। पहली अकार, दूसरी उकार और तीसरी मकार। प्रत्येक रेखा में नौ देवता विद्यमान होते हैं। भगवान शिव को रुद्राक्ष बहुत प्रिय है। रुद्राक्ष के दर्शन और स्पर्श मात्र से पाप नष्ट हो जाते हैं।

रुद्राक्ष की उत्पत्ति के संबंध में संत ने शिव पुराण में वर्णित शिव-पार्वती संवाद का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि महादेव ने माता पार्वती से कहा कि पूर्व काल में उन्होंने संयमपूर्वक हजारों वर्षों तक तपस्या की। तपस्या के दौरान उनके मन में लोक कल्याण का भाव आया। हजारों वर्षों की तपस्या के बाद जब दोनों नेत्र खोले तो उनके नेत्रों से गिरे अश्रुओं से रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई।

उन्होंने बताया कि रुद्राक्ष चार प्रकार के होते हैं—श्वेत, लाल, पीला और काला। भोग और मोक्ष की इच्छा रखने वालों को रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। चातुर्मासिक सत्संग के दौरान शिव महापुराण कथा में संत द्वारा बताए गए ये प्रसंग श्रद्धालुओं के लिए शिव आराधना, धार्मिक आचरण और जीवन में नियम के महत्व को रेखांकित करते हैं।

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