निम्बाहेड़ा। न्यायालय श्री अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सं. 1 ने 1,80,000 रुपये के चैक अनादरण के मामले में आरोपी योगेन्द्र सिंह पिता नारायण सिंह को दोषमुक्त कर दिया। मामले में आरोपी की ओर से अधिवक्ता निशान्त मेहता ने पैरवी की।

प्रकरण के संक्षिप्त तथ्य के अनुसार परिवादी फर्म ट्रेक्टर विक्रेता ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत परिवाद प्रस्तुत किया था। परिवाद में बताया गया कि आरोपित योगेन्द्र सिंह ने परिवादी फर्म से ट्रेक्टर खरीदा था। ट्रेक्टर की बकाया राशि 1,80,000 रुपये, अक्षरे एक लाख अस्सी हजार रुपये, की अदायगी के पेटे आरोपित ने बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा बोहेड़ा का 1,80,000 रुपये, अक्षरे एक लाख अस्सी हजार रुपये, का दिनांक 12/05/2014 को देय चैक दिया था।

परिवादी के अनुसार उक्त चैक बैंक में प्रस्तुत करने पर अनादरित हो गया। इसके बाद अभियुक्त के विरुद्ध चैक अनादरण का परिवाद प्रस्तुत किया गया।

मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी योगेन्द्र सिंह राजपूत की ओर से अधिवक्ता निशान्त मेहता ने न्यायालय के समक्ष दलील दी कि परिवादी फर्म ने ट्रेक्टर की बकाया राशि के संबंध में कोई हिसाब प्रस्तुत नहीं किया है। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि उक्त चैक किसी विधिक दायित्व के उन्मोचन हेतु प्रतिफलार्थ प्रस्तुत किया गया था।

अधिवक्ता निशान्त मेहता द्वारा प्रस्तुत दलीलों और पेश न्यायव्यवस्था से सहमत होते हुए न्यायालय श्री अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सं. 1, निम्बाहेड़ा ने अभियुक्त योगेन्द्र सिंह को चैक अनादरण के आरोप से दोषमुक्त कर दिया। इस फैसले के साथ 1,80,000 रुपये के चैक अनादरण से जुड़े मामले में आरोपी को राहत मिली।

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