कपासन में PKVY के तहत कृषक प्रशिक्षण, 125 किसानों को जैविक खेती की तकनीक की जानकारी
कपासन में परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण में 125 कृषकों ने भाग लिया। विशेषज्ञों और कृषि अधिकारियों ने जैविक खेती, वर्मी कम्पोस्ट, मृदा स्वास्थ्य और उन्नत तकनीकों की जानकारी दी।
तस्वीर में कपासन में आयोजित परंपरागत कृषि विकास योजना के कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान अधिकारी किसानों को संबोधित करते हुए और बैठक में उपस्थित किसान नजर आ रहे हैं।
काकंरवा, 16 सितम्बर 2026। परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के अंतर्गत चयनित क्लस्टर के कृषकों के लिए एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम कपासन में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण में चयनित क्लस्टर के 125 कृषकों ने भाग लिया।
प्रशिक्षण की अध्यक्षता सहायक निदेशक कृषि (विस्तार), कपासन हीरालाल सालवी ने की। कार्यक्रम के प्रभारी अधिकारी सहायक कृषि अधिकारी कपासन बालूराम शर्मा रहे। इस दौरान कृषि अधिकारी (फसल) एवं योजना प्रभारी प्रशांत कुमार जाटोलिया तथा प्रभारी वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक पारसमल रेगर भी उपस्थित रहे।
प्रशिक्षण में कृषि विज्ञान केंद्र, चित्तौड़गढ़ के प्रभारी डॉ. रतनलाल सोलंकी ने कृषकों को जैविक खेती के महत्व, उपयोगिता और विभिन्न तकनीकों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने जैविक खेती अपनाकर मृदा स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने तथा गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पादन प्राप्त करने से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी प्रदान की।
योजना प्रभारी प्रशांत कुमार जटोलिया ने कृषकों को परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के उद्देश्य, योजना के अंतर्गत संचालित गतिविधियों और कृषकों को मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सहायक कृषि अधिकारी, कपासन बालू राम शर्मा ने कृषकों को जैविक खेती की ओर प्रेरित करते हुए खेती की लागत कम करने, उत्पादन और उत्पाद की गुणवत्ता बढ़ाने तथा मृदा को रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के प्रतिकूल प्रभावों से बचाने के उपायों की जानकारी दी। उन्होंने उन्नत कृषि तकनीकों के बारे में भी कृषकों को बताया।
वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक पारसमल रेगर ने वर्मी कम्पोस्ट के महत्व, इसके उपयोग और वर्मी कम्पोस्ट निर्माण की विधि के बारे में विस्तृत तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने कृषकों को अपने खेतों पर जैविक खाद तैयार करने के लिए प्रेरित किया।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में सहायक कृषि अधिकारी, सिंहपुर गोपाललाल चाश्टा, कृषि पर्यवेक्षक, बनाकिया कला रतनलाल गुर्जर, कृषि पर्यवेक्षक, स्टेशन की पांडोली मुकेश चंद्र जाट, कृषि पर्यवेक्षक, हथियाना आशा जोशी, कृषि पर्यवेक्षक, सिंहपुर सदाम हुसैन सहित कृषि पर्यवेक्षक सुमित्रा जाट, तमन्ना जाट, मीना जाट, कालिका त्रिपाठी, चेतना शर्मा एवं महेश परिहार आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित अधिकारियों और कृषि पर्यवेक्षकों ने कृषकों को रासायनिक खेती पर निर्भरता कम करने, जैविक आदानों का अधिकाधिक उपयोग करने, मृदा की उर्वरता एवं जैविक गुणवत्ता बनाए रखने तथा टिकाऊ और लाभकारी कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। कृषकों ने प्रशिक्षण में उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए जैविक खेती और परंपरागत कृषि विकास योजना से संबंधित उपयोगी जानकारियां प्राप्त कीं।