नीलगाय के बच्चे के शिकार मामले में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, दो गिरफ्तार, जेल भेजे
बस्सी में नीलगाय के बच्चे के शिकार और कटान मामले में वन विभाग ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा, तीसरे व्यक्ति की जांच जारी।
तस्वीर में दिख रहे दो व्यक्ति सफेद वाहन के सामने खड़े हैं।
नीलगाय के बच्चे का शिकार कर उसे काटने के गंभीर मामले में वन विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया और न्यायालय में पेश किया, जहां से दोनों को 15 दिवस की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया।
यह कार्रवाई उप वन संरक्षक, चित्तौड़गढ़ श्री वी. केतन कुमार एवं सहायक वन संरक्षक (मुख्यालय), चित्तौड़गढ़ श्रीमती भावना शर्मा के निर्देशन में तथा क्षेत्रीय वन अधिकारी, विजयपुर श्री भूपेंद्र सिंह शक्तावत के नेतृत्व में की गई। कार्रवाई में मनोहर सिंह जाट सहायक वनपाल, नाका प्रभारी बिजयपुर, वनरक्षक मेघनाथ, योगेश कुमार गुजर, नारायण सिंह तंवर, महेन्द्र सिंह चुण्डावत और ओमप्रकाश बेनीवाल शामिल रहे।
वन विभाग ने मामले में एफआईआर दर्ज कर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 9, 39, 50, 51 और 52 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। प्रकरण में नीलगाय के बच्चे का शिकार कर उसे काटने का मामला सामने आया। वन विभाग की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए गोपाल लाल भील पुत्र शंकर लाल भील और भंवर लाल पुत्र नाथु लाल बागरिया को धांगलिया खेडा से गिरफ्तार किया। इसके बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दोनों को माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया गया।
गिरफ्तार दोनों व्यक्तियों से पूछताछ के दौरान इस अपराध में शामिल होने के संबंध में एक अन्य व्यक्ति का नाम भी सामने आया है। वन विभाग द्वारा उक्त व्यक्ति की भूमिका और प्रकरण में उसकी संभावित संलिप्तता की जांच की जा रही है। जांच में तथ्य प्रमाणित होने पर उसके विरुद्ध भी नियमानुसार विधिक कार्रवाई की जाएगी।
न्यायालय में पेश किए जाने के बाद दोनों गिरफ्तार व्यक्तियों को 15 दिवस की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने के आदेश दिए गए। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित वन्यजीवों के अवैध शिकार और उनसे संबंधित अपराधों के लिए कठोर दंड का प्रावधान है। गंभीर मामलों में दोषसिद्धि होने पर 3 वर्ष से 7 वर्ष तक के कारावास एवं कानून के अनुसार जुर्माने का प्रावधान हो सकता है।
वन विभाग की कार्रवाई के बाद अवैध शिकार में लिप्त लोगों में हड़कंप मचा हुआ है। विभाग ने स्पष्ट किया कि वन्यजीवों के अवैध शिकार और वन्यजीव अपराधों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।