तस्वीर में दिख रहे लोग एक भवन के बाहर खड़े होकर कुछ सामान थामे हुए नजर आ रहे हैं।

बड़ी सादड़ी के निकुंभ समता भवन में विगत 51 दिनों से चल रही प्रवचन श्रृंखला में शासन दीपक निश्चल मुनि ने नवजात शिशु के संस्कारों और माता-पिता के दायित्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संसार में जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात शिशु की पहली पाठशाला माता का गर्भ होती है। शिशु गर्भ में रहकर माता के संस्कारों और विचारों को महाभारत के अभिमन्यु की तरह प्रतिपल आत्मसात करता रहता है।

निश्चल मुनि ने श्रावकों को माता-पिता के प्रति संतान के दायित्व तथा गर्भधारण से ही संतान के प्रति माता-पिता के श्रेष्ठ संस्कारों और श्रेष्ठ विचारों के सही पोषण का विशेष महत्व बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में मोबाइल संस्कृति के दुष्प्रभावों के चलते माताएं अपने गर्भ में पल रहे शिशु के लिए समय नहीं दे पा रही हैं। इसकी वजह से जन्म लेने वाली संतानों में संस्कारों की गिरावट प्रत्यक्ष दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि आने वाला समय भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए चुनौती भरा है।

उन्होंने श्रेष्ठ माताओं के विभिन्न संस्कारों का उल्लेख करते हुए शास्त्र वर्णित माता त्रिशला, माता कौशल्या तथा माता देवकी के उदाहरण दिए और भगवान महावीर, राम और कृष्ण के सद्गुणों का विशद वर्णन किया।

समता युवा संघ के अध्यक्ष मनोज सहलोत ने बताया कि पर्यूषण पर्व के चलते समता भवन में अखंड नवकार महामंत्र का जाप दिन में महिला मंडल और रात्रि में पुरुष वर्ग द्वारा निरंतर किया जा रहा है।

जैन संघ अध्यक्ष महावीर कुमार मेहता ने बताया कि श्रावक अमित कुमार पोरवाल की पांच दिवस की तथा पियुष सहलोत की तीन दिवस की तप-तपस्या पूर्ण होने पर श्रावक संघ द्वारा हर्ष अनुमोदना की गई। सनातन श्रावक प्रेम सिंह सिसोदिया ने मुनिश्री के सुख साता तप का विनय वंदन किया। अतिथियों का आभार मंत्री प्रदीप जैन ने जताया।


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