तस्वीर में दिख रहे इंटर्न्स जिला कलेक्टर कार्यालय के बाहर खड़े हैं।

राजकीय मेडिकल कॉलेज के अधीन जिला चिकित्सालय में कार्यरत समस्त फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स (एफएमजी) इंटर्न्स ने स्टाइपेंड नहीं मिलने को लेकर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। अपनी मांगों को लेकर एफएमजी इंटर्न्स ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट्स इंटर्न्स के समान स्टाइपेंड देने की मांग की।

ज्ञापन में इंटर्न्स ने अपनी दिनचर्या और कार्यप्रणाली का उल्लेख करते हुए बताया कि वे ओपीडी से लेकर नाइट ड्यूटी और लेबर रूम तक अस्पताल के सभी प्रमुख विभागों में अपनी अनिवार्य सेवाएं दे रहे हैं। भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट्स की तरह ही वे समान घंटों तक ड्यूटी निभाते हैं और मरीजों की देखभाल के साथ अस्पताल की व्यवस्थाओं में भी पूरी जिम्मेदारी से योगदान दे रहे हैं।

इंटर्न्स का कहना है कि इसके बावजूद उन्हें अब तक किसी भी प्रकार का स्टाइपेंड प्रदान नहीं किया जा रहा है। स्टाइपेंड नहीं मिलने से कई छात्रों के सामने गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। छात्रों ने राजस्थान सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारतीय मेडिकल ग्रेजुएट्स इंटर्न्स को सरकार की ओर से 21 हजार 700 रुपये प्रति माह स्टाइपेंड दिया जा रहा है।

छात्रों ने कहा कि समान अस्पताल और समान कार्यभार होने के बावजूद एफएमजी इंटर्न्स को स्टाइपेंड से वंचित रखा गया है। उनके अनुसार कार्य और जिम्मेदारियों में कोई अंतर नहीं होने के बावजूद स्टाइपेंड के मामले में किया जा रहा यह भेदभाव न्यायसंगत नहीं है।

जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में एफएमजी इंटर्न्स ने जल्द से जल्द आईएमजी के समान नियमानुसार स्टाइपेंड जारी करने की मांग रखी। ज्ञापन प्राप्त करने के बाद जिला कलेक्टर ने छात्रों की बात को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी इस जायज मांग को राज्य सरकार और संबंधित उच्च अधिकारियों तक तुरंत पहुंचाया जाएगा।

एफएमजी इंटर्न्स की स्टाइपेंड की मांग अब राज्य सरकार और संबंधित उच्च अधिकारियों तक पहुंचने के बाद आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

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