जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चित्तौड़गढ़ के नेतृत्व में विद्यार्थियों को अपहरण और बाल तस्करी से बचाव के लिए सुरक्षित व्यवहार तथा संदिग्ध स्थिति में सहायता लेने की जानकारी दी गई।

चित्तौड़गढ़ में बाल तस्करी रोकने हेतु विशेष जागरूकता शिविर आयोजित

राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदेश के किशोर विद्यार्थियों को उनके कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से एक अभिनव और महत्वाकांक्षी कार्यक्रम 'ट्रांसफॉर्मेटिव मंगलवार' संचालित किया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण चित्तौड़गढ़ के तत्वावधान में महीने के प्रथम एवं तृतीय मंगलवार को बच्चों को अपहरण और बाल तस्करी से बचाने के उद्देश्य से विशेष विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अध्यक्ष मानसिंह चुण्डावत के निर्देशों पर प्राधिकरण सचिव योगिता पारीक के नेतृत्व में मंगलवार को राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय (राबाउमावि) में बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए 'अजनबी से सावधान, मना करो, दूर जाओ, बताओ' विषय पर एक महत्वपूर्ण जागरूकता कार्यक्रम संपन्न हुआ।

इस जागरूकता कार्यक्रम का मुख्य ध्येय स्कूली बच्चों को अनजान व्यक्तियों से पूरी तरह सुरक्षित रहने तथा किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में सही कदम उठाने के प्रति जागरूक करना था। शिविर के दौरान सचिव योगिता पारीक ने बच्चों को विस्तार से समझाया कि यदि कोई अजनबी व्यक्ति गलत तरीके से बात करने की कोशिश करे, कोई सामान देने का लालच दे या अपने साथ कहीं चलने को कहे, तो उसे स्पष्ट रूप से 'नहीं' कहना चाहिए। उन्होंने आगे बताया कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होते ही तुरंत उस व्यक्ति से दूरी बनाकर किसी सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए तथा पूरी घटना के बारे में बिना किसी डर के अपने माता-पिता, शिक्षकों या किसी अन्य विश्वसनीय बड़े व्यक्ति को सूचित करना चाहिए।

सचिव ने विद्यार्थियों का ध्यान इस बात की ओर भी आकर्षित किया कि यदि कोई व्यक्ति उन्हें डराने, धमकाने अथवा यह बात किसी को न बताने के लिए दबाव बनाए, तब भी उन्हें बिल्कुल चुप नहीं रहना चाहिए। अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहायता मांगना हर स्थिति में पूरी तरह सही कदम है। आयोजन के दौरान बच्चों ने बेहद उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के समापन पर सभी विद्यार्थियों को सुरक्षित व्यवहार के प्रति सदैव सजग रहने और इस जागरूकता को अन्य लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया गया।

इसके साथ ही न्याय व्यवस्था से जुड़े विभिन्न न्यायिक अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने भी पृथक-पृथक शिविरों का आयोजन कर बच्चों को अजनबियों से सावधान रहने का संदेश दिया। इनमें न्यायाधीश किशन लाल चौधरी, अचला आर्य, लता गौड, शहनाज परवीन, देवेन्द्र सिंह पंवार, न्यायाधीश एडीजे 01 शरद कुमार व्यास, अतिरिक्त न्यायिक मजिस्ट्रेट राजेश बजाड़, न्यायिक मजिस्ट्रेट एन.आई. एक्ट मेघना यादव, न्यायिक अधिकारी ग्राम न्यायालय वीणा सुवालका, न्यायिक मजिस्ट्रेट तमन्ना कुमारी, प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट पूनम सेन शामिल रहे। इनके अलावा ताल्लुकाओं पर पदस्थ न्यायिक अधिकारियों, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के सदस्यों, पैनल अधिवक्ताओं और पैरा लीगल वॉलंटियर्स (पीएलवी) ने भी सक्रिय भूमिका निभाते हुए बच्चों को जागरूक किया।

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