कांकरवा में धूमधाम से मनाई जलझूलनी एकादशी, निकली भव्य राम रेवाड़ी
चारभुजा नाथ मंदिर से पूजा-अर्चना के बाद भगवान के बेवाण को जलाशय ले जाया गया, जहां विधि-विधान से जलविहार कराया गया।
तस्वीर में फूलों से सजे बेवाण को कंधे पर ले जाते श्रद्धालु दिख रहे हैं।
काकंरवा, 23 सितंबर। जलझूलनी एकादशी का पर्व श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ धूमधाम से मनाया गया। चारभुजा नाथ मंदिर से भगवान को बेवाण में विराजित कर डीजे और ढोल-धमाकों के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा महादेव मंदिर चौक होते हुए रावला चौक पहुंची। इसके बाद रावला राज मंदिर पहुंचकर भगवान श्री चारभुजा नाथ और लडू गोपाल की पूजा-अभिषेक किया गया तथा प्रभु का 108 तुलसी और पुष्प अर्चन किया गया।
पूजन के बाद प्रभु को बेवाण में विराजमान किया गया। दोनों मंदिरों के बेवाणों के साथ राम रेवाड़ी निकाली गई। भगवान के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। हर समाज के समाजसेवी लोगों ने जगह-जगह फूलों और फलों से स्वागत किया तथा नारियल प्रभु के चरणों में रखे। गांव के बड़े-बुजुर्ग ढोलक, ताल और मजीरे बजाते हुए भजन-कीर्तन करते हुए राम रेवाड़ी में शामिल हुए। शोभायात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए राम रेवाड़ी तालाब पर पहुंची।
राम रेवाड़ी के आगे गवरी नृत्य करते हुए श्रद्धालु चल रहे थे। इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। श्रद्धालु डीजे की मधुर स्वर लहरियों और धार्मिक भजनों पर नाचते-झूमते तथा अंबिर उड़ाते हुए चल रहे थे। भक्त हाथों में चंवर लेकर उन्हें ढोलते हुए भगवान की सेवा कर रहे थे। ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ और ‘प्रभु आपकी जय हो’ के जयकारों से पूरा क्षेत्र धर्ममय हो उठा।
जलाशय पहुंचने पर पुजारियों ने विधि-विधान के साथ भगवान को झूला झुलाया और जलविहार कराया। विशेष पूजा-अर्चना के बाद आरती उतारी गई। पूजा संपन्न होने पर उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया। अनुष्ठान के बाद भगवान के बेवाणों को ससम्मान पुनः मंदिर ले जाया गया। जलझूलनी एकादशी पर निकली राम रेवाड़ी में धार्मिक आस्था, परंपरा और सामूहिक सहभागिता का दृश्य पूरे आयोजन के दौरान देखने को मिला।