तस्वीर में चित्तौड़गढ़ की सड़क पर बेवाण के साथ नृत्य करते श्रद्धालु दिख रहे हैं।   

चित्तौड़गढ़ में जलझूलनी एकादशी के अवसर पर श्री सर्वेश्वर मंदिर से ठाकुरजी की रामरेवाडी भजन-कीर्तन के साथ रवाना हुई। सर्वेश्वर महिला मंडल ने भजन गाते हुए शोभायात्रा की शुरुआत की। ठाकुरजी को फूलों और लाइट से सुसज्जित बेवाण में विराजित किया गया, जिसे सर्वेश्वर समिति के सदस्यों ने अपने कंधों पर धारण कर रखा था। इस दौरान कोई छत्र धारण किए हुए था तो कोई चंवर ढुला रहा था।

शोभायात्रा में श्रद्धालु नाचते-गाते आगे बढ़े। क्षेत्रीय पार्षद ने भी नृत्य कर ठाकुरजी को रिझाया। जगदीशचंद्र ओझा का श्रीकृष्ण की वेशभूषा में किया गया नृत्य आकर्षण का केंद्र रहा। मार्ग में जगह-जगह भक्तों ने आरती उतारकर और प्रसाद वितरण कर शोभायात्रा का स्वागत किया।

चामटी खेड़ा चौराहे पर फलिहारी खिचड़ी का वितरण किया गया। डीजे पर सांवलियाजी और चारभुजानाथ के भजनों की स्वरलहरी लगातार गूंजती रही। शोभायात्रा में कई गणमान्य स्त्री-पुरुषों ने भाग लिया।

शोभायात्रा गंभीरी नदी के तट पर पहुंची, जहां ठाकुरजी की चल प्रतिमा को जलविहार करवाया गया। इसके बाद भगवान को नवीन वस्त्राभूषण धारण करवाकर आरती उतारी गई। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ ठाकुरजी के दर्शन का लाभ लिया।

शोभायात्रा के पुनः मंदिर पहुंचने पर भगवान की पूजा-अर्चना और आरती की गई। इसके बाद प्रसाद वितरण के साथ रामरेवाडी का समापन हुआ।

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