तस्वीर में डूंगला के परिसर में बैठे लोग महिला को कपड़े दे रहे हैं।

डूंगला। क्षमापना पर्व के पावन अवसर पर वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ डूंगला ने करीब 75 वर्षों से चली आ रही सेवा एवं परोपकार की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए गरीब और असहाय लोगों की सहायता की। संवत्सर के दूसरे दिन आयोजित इस सेवा कार्य में आसपास के क्षेत्रों से आए करीब 150 से 200 जरूरतमंद एवं असहाय लोगों को वस्त्र, कंबल आदि सामग्री वितरित की गई।

करीब 75 वर्षों से जारी यह सेवा परंपरा डूंगला के जैन समाज की उस पहल का प्रतीक है, जिसके माध्यम से क्षमापना पर्व को मानव सेवा और करुणा से जोड़ा जा रहा है। सेवा कार्य के दौरान जरूरतमंदों को वस्त्र और कंबल सहित आवश्यक सामग्री प्रदान की गई।

इस अवसर पर संघ अध्यक्ष श्री शांतिलाल जी मेहता, महामंत्री श्री कनकमल जी दक, उपाध्यक्ष श्री धरमचंद जी पीतलिया, संरक्षक श्री बाबूलाल जी दानी, चातुर्मास सेवा समिति अध्यक्ष श्री सुरेशचंद्र जी पीतलिया, चातुर्मास समिति मंत्री श्री रमेशचंद्र जी मेहता, संघ कोषाध्यक्ष श्री मदनलाल जी मोगरा, श्री राजेंद्र जी मोगरा, श्री इंद्रमल जी दक एवं श्री पारसमल जी दक सहित संघ के पदाधिकारी, सदस्य एवं समाजजन उपस्थित रहे।

संघ पदाधिकारियों ने कहा कि क्षमापना केवल शब्दों से क्षमा मांगने का पर्व नहीं, बल्कि मन में करुणा, मैत्री और सेवा की भावना जगाने का पर्व है। जरूरतमंदों की सहायता कर उनके जीवन में खुशियां लाना ही इस पावन पर्व की वास्तविक सार्थकता है।

डूंगला में 75 वर्षों से निरंतर चली आ रही यह सेवा परंपरा आज भी समाज में “सेवा ही सच्ची साधना है” का संदेश दे रही है।

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