तस्वीर में चित्तौड़गढ़ जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक के दौरान अधिकारी चर्चा करते हुए दिखाई दे रहे हैं।

चित्तौड़गढ़, 07 अगस्त, 2026। जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के सभागार में जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक का आयोजन जिला कलक्टर डॉ मंजू की अध्यक्षता में हुआ। बैठक में उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित प्रसव पूर्व जांच, सतत फॉलोअप और सुरक्षित संस्थागत प्रसव सुनिश्चित कराने पर विशेष जोर दिया गया। जिला कलक्टर ने सभी पीएमओ, बीसीएमओ तथा प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश दिए कि उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं को उपचार और निगरानी में प्राथमिकता दी जाए।

जिला कलक्टर डॉ मंजू ने कहा कि एनीमिया (खून की कमी), उच्च रक्तचाप (बीपी), मधुमेह (शुगर) तथा पूर्व में जटिल प्रसव के इतिहास वाली गर्भवती महिलाओं की पहचान पहली तिमाही में ही की जाना आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि ऐसी महिलाओं की नियमित ट्रैकिंग की जाए और प्रसव की संभावित तिथि से पहले ही उन्हें उच्च स्वास्थ्य केंद्रों पर रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

उन्होंने सभी चिकित्सा अधिकारियों को प्रत्येक माह 9, 18 और 27 तारीख को आयोजित होने वाले प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत सभी गर्भवती महिलाओं की न्यूनतम एक प्रसव पूर्व जांच चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से कराने के निर्देश दिए। साथ ही उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का चिन्हीकरण कर उनकी जांच स्त्री रोग विशेषज्ञ के माध्यम से कराने के भी निर्देश दिए। जिला कलक्टर ने सीएचओ के माध्यम से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं का नियमित फॉलोअप कराने, प्रत्येक मातृ मृत्यु के कारणों की विस्तृत समीक्षा करने तथा सेक्टर बैठकों में सेक्टर, खण्ड और जिला स्तरीय अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित कर बैठकों को सुदृढ़ बनाने के निर्देश भी दिए।

बैठक में सीएमएचओ डॉ गुप्ता ने विभागीय गतिविधियों की ब्लॉकवार लक्ष्य एवं उपलब्धियों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभागीय गतिविधियों के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीटीओं डॉ राकेष भटनागर ने टी.बी. मुक्त भारत अभियान की प्रगति प्रस्तुत की, जबकि प्रभारी जिला औषधि भण्डार डॉ कमलेष शर्मा ने मुख्यमंत्री निरोगी राजस्थान योजना की जिलेवार प्रगति का प्रस्तुतिकरण करते हुए वर्तमान में मौजूद कमियों को दूर करने के निर्देश दिए। सभी प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों को आभा आधारित ओपीडी को बढ़ावा देने तथा ओपीडी की सभी पर्चियों का शत-प्रतिशत इन्द्राज आईएचएमएस सॉफ्टवेयर पर सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए।

अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (प.क.) डॉ घनष्याम चांवला ने परिवार कल्याण कार्यक्रम, मौसमी बीमारियों की रोकथाम, बचाव, उपचार एवं नियंत्रण के लिए दैनिक सर्वे, एन्टीलार्वा, एन्टीएडल्ट, सोर्स रिडक्शन तथा आईईसी गतिविधियों को नियमित रूप से संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी बीसीएमओ को घर-घर सर्वे कर मरूधर एप पर शत-प्रतिशत इन्द्राज सुनिश्चित कराने के लिए भी निर्देशित किया।

आरसीएचओ डॉ प्रियंका वर्मा ने डिलीवरी पॉईन्ट सूचकांक, एएनसी पंजीकरण, एचपीवी एवं नियमित टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा प्रस्तुत की। वहीं डीपीएम विनायक मेहता ने ई-प्रेस्क्रिप्षन, डीएचआईएस पंजीकरण तथा आईरेड पोर्टल पर सड़क दुर्घटना पीड़ितों के पंजीकरण की प्रगति की समीक्षा रखी।

बैठक में समस्त बीसीएमओं, सांख्यिकी अधिकारी विनोद कुमार गन्ना, सहायक सांख्यिकी अधिकारी नरपत सिंह, सांख्यिकी निरीक्षक रिंकू मीणा, जिला डाटा मैनेजर खुषवन्त कुमार हिण्डोनिया, डीपीसी-एनपीएनसीडी डॉ. दिग्विजय सिंह, जिला आशा समन्वयक देवीलाल भील, जिला नोडल अधिकारी संजना अग्रवाल, हैल्थ मेनेजर विकास पारिक, सभी बीपीएम सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभागीय योजनाओं की प्रगति की विस्तृत समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए गए।

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