बस्सी: साड़ास पंचायत में फर्जी पट्टे जारी करने का आरोप, ग्रामीणों ने दर्ज कराई शिकायत
आचार संहिता के बीच संदिग्ध परिस्थिति में देर रात रजिस्ट्री का आरोप, ग्रामीणों ने रिकॉर्ड जब्त कर जांच और पट्टे निरस्त करने की मांग की।
तस्वीर में साड़ास गांव के ग्रामीण पुलिस थाने के बाहर खड़े होकर विरोध जताते हुए दिख रहे हैं।
बस्सी। (प्रातकाल संवाददाता)। पंचायतों का कार्यकाल आचार संहिता लागू होने के साथ ही समाप्त हो गया है, लेकिन पंचायत में नियुक्त प्रशासक और सचिव द्वारा मनमाने तरीके से पट्टे जारी किए जाने का मामला सामने आया है। साड़ास ग्राम पंचायत में बड़ी संख्या में ग्रामीण फर्जी पट्टों की जांच की मांग को लेकर थाने पहुंचे। ग्रामीणों ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो और उपखंड अधिकारी को भी प्रार्थना पत्र देकर पट्टे निरस्त करने तथा एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
दो अक्टूबर को हुई विशेष ग्राम सभा के संदर्भ में ग्रामीणों ने अपने प्रार्थना पत्र में बताया कि ग्राम पंचायत के वर्तमान प्रशासक और संबंधित कर्मचारियों द्वारा बड़े पैमाने पर फर्जी पट्टे जारी कर भ्रष्टाचार किया गया है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार करते हुए कूटरचित पट्टे बांटे गए। ग्रामीणों का कहना है कि जो लोग पट्टों के पात्र नहीं हैं और न ही उनका जमीन पर कब्जा है, ऐसे लोगों को भी पट्टे जारी कर दिए गए। इससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने के साथ सरकारी भूमि पर अनुचित लाभ दिए जाने का आरोप लगाया गया है।
बीती रात फर्जी पट्टों को लेकर हंगामा खड़ा हो गया। ग्रामीणों ने रात 11 बजे संदिग्ध परिस्थिति में रजिस्ट्री करवाने के आरोप लगाए। उनका कहना है कि कृषि मंडी भूमि, बिलानाम और सुरजनियास की आबादी भूमि में बिना प्रस्ताव के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर पट्टे जारी किए गए हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि रात 11 बजे रजिस्ट्री करवाना बड़े षड्यंत्र की ओर इशारा करता है।
ग्रामीणों ने प्रशासक सुखी देवी, सचिव राहुल मीणा, रजिस्ट्री करने वाले अधिकारी और लाभार्थियों के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पट्टे जारी करने की प्रक्रिया में ग्राम सभा का आयोजन किया जाता है, लेकिन बिना सार्वजनिक आपत्तियां मांगे और बिना ग्राम सभा के अनुमोदन के फर्जी कागजात तैयार कर पट्टे बना दिए गए। आरोप यह भी है कि सार्वजनिक उपयोग की जमीनों, रास्तों और सरकारी भूमि को भी बेच दिया गया, जिससे ग्रामीण अपने अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।
ग्रामीणों ने साड़ास पट्टा रिकॉर्ड को जब्त कर निष्पक्ष और त्वरित जांच कराने की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक सभी पट्टों पर रोक लगाने और फर्जी पट्टों को निरस्त करने की मांग भी की गई है।