तस्वीर में आसावरा माता शक्तिपीठ में नवरात्र की अष्टमी पर हवन और पूर्णाहुति के दौरान आहुति देते यजमान व उपस्थित श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।

बड़ीसादड़ी। बांसी-बोहेड़ा रेलवे स्टेशन के समीप स्थित आसावरा माता शक्तिपीठ में नवरात्र की अष्टमी पर हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। छह घंटे तक चले हवन, पूर्णाहुति और प्रसाद वितरण के साथ मेले का समापन हुआ। सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर में माता के दर्शन, भक्ति और धार्मिक आयोजनों का सिलसिला जारी रहा। चार दशक से अधिक समय से माता की प्रतिमा के समक्ष अखंड ज्योत प्रज्वलित है, जो क्षेत्र के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक बनी हुई है।

ट्रस्ट अध्यक्ष चमन सिंह सारंगदेवोत ने बताया कि नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचे और खुशहाली की कामना की। सप्तमी की रात आयोजित भक्ति संध्या में स्थानीय भजन गायकों ने भजनों की प्रस्तुतियां देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। अष्टमी पर सुबह 9:30 बजे हवन शुरू हुआ, जो दोपहर 3:30 बजे तक चला। मुख्य यजमान गोपाल लाल जणवा और सहायक यजमान मांगीलाल व्यास ने पंडित गजेंद्र चौबीसा के सानिध्य में 21 किलो घी से आहुतियां दीं। पूर्णाहुति के बाद बूंदी प्रसाद वितरण शुरू हुआ, जो देर रात तक जारी रहा। स्वयंसेवकों ने हजारों श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया।

आसावरा माता शक्तिपीठ धार्मिक आस्था के साथ सेवा कार्यों के लिए भी विशेष पहचान रखता है। लकवाग्रस्त रोगियों के स्वस्थ होने की मान्यता के चलते यहां दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। बीमारों और उनके परिजनों की सुविधा के लिए आसावरा माता अन्नपूर्णा समिति की ओर से दोनों समय निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाता है। श्रद्धालुओं को ठहरने के लिए धर्मशाला के साथ रसोई के बर्तन भी निःशुल्क दिए जाते हैं।

मंदिर के विकास में करीब 40 गांवों के श्रद्धालु वर्षों से तन-मन-धन से सहयोग कर रहे हैं। ट्रस्ट पदाधिकारी एवं पूर्व मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी हीरालाल चौबीसा ने कहा कि आसावरा माता शक्तिपीठ क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। ऐसे आयोजन समाज में एकता, सेवा और संस्कारों को मजबूत करने के साथ नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ते हैं।

ट्रस्ट व्यवस्थापक ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर परिसर के सौंदर्यीकरण के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। बांसी निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट गोपाल बसेर की ओर से घोषित 10 लाख रुपये की लागत वाले सर्वसुविधायुक्त हॉल का निर्माण पूरा हो चुका है। वहीं, बांसी के मूल निवासी और मुंबई के व्यवसायी रोशन लाल मालू अपनी माताजी मांगीबाई मालू की स्मृति में 15 लाख रुपये से अधिक की लागत से एक बड़े हॉल का निर्माण करवा रहे हैं। दोनों हॉल बनने से दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

क्षेत्र के श्रद्धालुओं के संकल्प और सहयोग से मंदिर में चार दशक से अधिक समय से माता की प्रतिमा के समक्ष अखंड ज्योत प्रज्वलित है। मंदिर परिसर में सुसज्जित उपवन, झूले और फव्वारे भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। बत्तखों, खरगोशों, कबूतरों और विभिन्न पक्षियों की मौजूदगी परिसर की प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाती है। धार्मिक वातावरण के साथ परिसर की शांत और मनोरम छटा श्रद्धालुओं को सुकून देती है।

पूरे नवरात्र में प्रतिदिन आरती के बाद माता के दरबार में गरबा आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। भक्तों के सहयोग से रोजाना आरती के बाद प्रसाद वितरण भी किया गया। मेले में लगी दुकानों पर महिलाओं और बच्चों ने खरीदारी का आनंद लिया। आयोजन की व्यवस्थाओं और प्रसाद वितरण में ट्रस्ट पदाधिकारियों एवं स्वयंसेवकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। धार्मिक आयोजनों, सेवा सुविधाओं और विकास कार्यों के माध्यम से आसावरा माता शक्तिपीठ क्षेत्र की आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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