आकोला की दाबू प्रिंट कला को मिली नई पहचान, 5 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत
पाली में आयोजित लघु उद्योग भारती सम्मेलन में सीएम भजन लाल शर्मा का दाबू प्रिंट दुपट्टों से स्वागत किया गया, कारीगरों को मिलेंगे नए अवसर।
मंच पर लघु उद्योग भारती सम्मेलन के दौरान दाबू प्रिंट दुपट्टा पहने अतिथि खड़े हैं।
प्रातःकाल संवाददाता नन्द लाल तेली, चित्तौड़गढ़। आकोला की विश्व प्रसिद्ध पारंपरिक दाबू प्रिंट कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। पाली में लघु उद्योग भारती द्वारा आयोजित प्रदेश सम्मेलन में राजस्थान की इस पारंपरिक हस्तशिल्प कला को विशेष सम्मान मिला। सम्मेलन में पहुंचे राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री मदन राठौड़, लघु उद्योग भारती के राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री प्रकाश चंद्र जी भाईसाब, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री घनश्याम ओझा एवं राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष श्री योगेंद्र शर्मा का आकोला की दाबू प्रिंट कला से निर्मित दुपट्टों से स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
इस अवसर पर आकोला लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष श्री उदय लाल छिपा, सचिव श्री लक्ष्मी लाल छिपा, कोषाध्यक्ष श्री हीरालाल छिपा एवं श्री मनीष कुमार छिपा ने अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने आकोला की दाबू प्रिंट कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने तथा इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त किया।
दाबू प्रिंट कला के विकास के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इससे संबंधित कार्य भी प्रारंभ हो चुका है। बजट और विकास कार्यों से क्षेत्र के पारंपरिक कारीगरों को अपनी कला को व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाने के साथ बेहतर कार्य अवसर और बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है।
आकोला क्षेत्र में कारीगर पीढ़ियों से प्राकृतिक रंगों, मिट्टी आधारित दाबू तकनीक तथा पारंपरिक लकड़ी के ब्लॉकों के माध्यम से कपड़ों पर आकर्षक डिजाइनों का निर्माण करते आ रहे हैं। दाबू प्रिंट कला केवल हस्तशिल्प नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
दाबू प्रिंट कला को व्यापक स्तर पर बढ़ावा मिलने से आकोला एवं आसपास के क्षेत्र के पारंपरिक कारीगरों को नए बाजारों से जुड़ने, उत्पादन बढ़ाने और अपने उत्पादों को देश-विदेश तक पहुंचाने के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही युवाओं को इस पारंपरिक कला से जुड़कर रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर मिलने की संभावना है।
विकास कार्यों के माध्यम से दाबू प्रिंट से जुड़े कारीगरों की कार्यक्षमता बढ़ाने, उत्पादन को संगठित करने, आधुनिक बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पाद विकसित करने तथा विपणन एवं ब्रांडिंग को मजबूत करने की दिशा में भी सकारात्मक परिणाम आने की उम्मीद है।
आकोला की दाबू प्रिंट कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक पहचान दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। पारंपरिक कला को आधुनिक डिजाइन, बेहतर उत्पाद विकास और नए बाजारों से जोड़कर इसे आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रखने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रदेश सम्मेलन में आकोला की दाबू प्रिंट कला से निर्मित दुपट्टों से अतिथियों का स्वागत किया जाना भी राजस्थान की पारंपरिक हस्तशिल्प कलाओं को प्रदेश स्तर पर मिल रहे सम्मान एवं प्रोत्साहन को दर्शाता है।
इस अवसर पर कपासन विधायक माननीय श्री अर्जुन लाल जी जीनगर सा. का भी आभार व्यक्त किया गया। दाबू प्रिंट कला एवं आकोला के कारीगरों को आगे बढ़ाने तथा क्षेत्र की पारंपरिक कला को उचित मंच एवं पहचान दिलाने में सहयोग के लिए उनका धन्यवाद किया गया।
आकोला के कारीगरों एवं लघु उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार, लघु उद्योग भारती एवं जनप्रतिनिधियों के सहयोग से आकोला की दाबू प्रिंट कला आने वाले समय में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाएगी। यह पहल आकोला की पारंपरिक कला के संरक्षण के साथ स्थानीय कारीगरों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने और आकोला को दाबू प्रिंट कला के प्रमुख केंद्र के रूप में और अधिक स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।