तस्वीर में बड़ी सादड़ी में व्यास पीठ पर विराजमान कथावाचक का शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन करते श्रद्धालु।   

बड़ी सादड़ी। श्रीरामद्वारा दिव्य आनंदधाम में श्राद्ध पक्ष के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस व्यास पीठ से अनंत राम महाराज ने अजामिल उद्धार की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत महापुराण की यह कथा बताती है कि भगवान का नाम कितना शक्तिशाली है और मनुष्य को जीवन में कभी भी सुधार की आशा नहीं छोड़नी चाहिए।

कथा में बताया गया कि प्राचीन समय में अजामिल नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वह विद्वान, सदाचारी और भगवान का भक्त था। वह माता-पिता की सेवा करता था तथा धार्मिक नियमों का पालन करता था। एक दिन वन में जाते समय उसने एक स्त्री और पुरुष को अनुचित अवस्था में देखा। उस दृश्य का उसके मन पर बुरा प्रभाव पड़ा। धीरे-धीरे उसका विवेक नष्ट होने लगा और वह उस स्त्री के मोह में पड़ गया।

इसके बाद अजामिल ने अपने अच्छे संस्कार और धर्म-कर्म छोड़ दिए तथा चोरी, छल-कपट और अधर्म के रास्ते पर चल पड़ा। उसके कई पुत्र हुए, जिनमें सबसे छोटे पुत्र का नाम उसने 'नारायण' रखा। अजामिल को अपने सबसे छोटे पुत्र नारायण से बहुत प्रेम था। वह दिनभर उसे पुकारता रहता था, "नारायण! नारायण!"

जब अजामिल का अंतिम समय आया तो उसके सामने भयंकर यमदूत प्रकट हुए। उन्हें देखकर वह भयभीत हो गया। उस समय उसने अपने पुत्र को पुकारते हुए जोर से कहा, "नारायण!" यद्यपि अजामिल अपने पुत्र को पुकार रहा था, लेकिन उसके मुख से भगवान नारायण का नाम निकला।

तभी भगवान विष्णु के विष्णुदूत वहां प्रकट हुए और यमदूतों को अजामिल के प्राण ले जाने से रोक दिया। यमदूतों ने पूछा कि यह व्यक्ति जीवनभर पाप करता रहा है, फिर इसे दंड से क्यों बचाया जा रहा है? विष्णुदूतों ने समझाया कि भगवान का नाम अत्यंत शक्तिशाली है। अजामिल ने अपने पुत्र को पुकारते हुए ही सही, लेकिन उसके मुख से भगवान का नाम निकला और उसके अनेक पाप नष्ट हो गए।

यह सुनकर यमदूत वापस चले गए और उन्होंने भगवान के भक्तों के विषय में धर्मराज यम से शिक्षा प्राप्त की। अजामिल को अपनी पूरी जिंदगी की गलतियों का एहसास हुआ। उसने सोचा, "मैंने अपना जीवन व्यर्थ कर दिया। भगवान ने मुझे दूसरा अवसर दिया है।"

इसके बाद अजामिल ने सांसारिक मोह त्याग दिया और हरिद्वार जाकर भगवान की भक्ति, ध्यान और नाम-स्मरण करने लगा। अंततः उसने भगवान का सच्चा भजन करते हुए शरीर त्याग दिया और भगवान के धाम को प्राप्त हुआ।

अनंत राम महाराज ने बताया कि अजामिल उद्धार की कथा सिखाती है कि भगवान का नाम अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली है। बुरी संगति मनुष्य को पतन की ओर ले जा सकती है। मनुष्य चाहे कितना भी गिर जाए, सुधार का मार्ग हमेशा खुला रहता है। केवल मृत्यु के समय नाम लेने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि जीवनभर भगवान का स्मरण करना चाहिए। सच्चे पश्चात्ताप और भक्ति से मनुष्य अपने जीवन को बदल सकता है। उसने भवसागर पार करने का मार्ग पा लिया। देर भले हो जाए, पर भगवान की शरण में आने में कभी देर नहीं होती।

कथा कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य यजमान मुकेश सोनी (बड़वल) एवं प्रवीण सोनी अलंकार ज्वैलर्स ने व्यास पीठ पर स्वामी अनंतराम महाराज को शाल एवं उपर्णा पहनाकर अभिनंदन किया। कथा कार्यक्रम के दौरान पूर्व नपा अध्यक्ष विनोद कंठालिया के नेतृत्व में पूर्व नपा अध्यक्ष आभा महात्मा एवं भाजपा के नव निर्वाचित पार्षदों ने व्यासपीठ पर स्वामी अनंतराम महाराज को माला एवं शॉल ओढ़ाकर अभिनंदन किया। व्यास पीठ से समस्त अतिथियों को उपरना पहनाकर अभिनंदन किया गया।

कथा के दौरान रामद्वारा दिव्य आनंदधाम के चमत्कारी संतों के बारे में जानकारी दी गई, जिस पर पंडाल करतल ध्वनि से गूंज उठा। कथा में ध्रुव चरित्र, वामन अवतार सहित अनेक प्रसंगों का विस्तार से वर्णन करते हुए नंद उत्सव मनाया गया। नगर सहित आसपास के अनेक गांवों के श्रद्धालु नित्य सहभागिता कर रहे हैं।

कथा कार्यक्रम के अंत में आरती की गई। खीर प्रसाद की व्यवस्था कोलकाता निवासी डॉ देवज्योति रॉय द्वारा की गई।

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