तस्वीर में आकोला में जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी और स्थानीय लोग पानी के नमूनों के साथ नजर आ रहे हैं।

प्रातःकाल संवाददाता नन्द लाल तेली, चित्तौड़गढ़। आकोला में दूषित पेयजल की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED Laboratory Chittorgarh) की टीम ने विभिन्न वार्डों और प्रभावित क्षेत्रों में विस्तृत निरीक्षण एवं सर्वे अभियान चलाया। टीम ने जलापूर्ति व्यवस्था, पानी की गुणवत्ता और संभावित लीकेज की स्थिति का जायजा लिया तथा जांच के लिए पानी के नमूने एकत्र किए।

सहायक अभियंता रूपा राम, गोपाल लाल माली और कनिष्ठ अभियंता की टीम आकोला नगरपालिका के विभिन्न वार्डों में पहुंची। निरीक्षण के दौरान जलापूर्ति समय पर विभिन्न उपभोक्ताओं के घरों से जीवाणु (बैक्टीरिया) जांच और रासायनिक जांच के लिए जल के नमूने लिए गए। इसके साथ ही पीने के पानी में अवशिष्ट क्लोरीन (Residual Chlorine) की मौजूदगी की भी गहन जांच की गई।

प्रभावित क्षेत्रों में जल वितरण नेटवर्क का सर्वे कर किसी भी प्रकार के लीकेज की संभावना की जांच की गई। इस दौरान टीम ने क्षेत्र के मुख्य जल स्रोत अखाड़ा चौक का विशेष निरीक्षण भी किया।

निरीक्षण में सामने आया कि ओपन वेल (Open Well) की दीवार के पास नाली का पानी लगातार बह रहा है। इससे नाली का दूषित पानी रिसकर (seepage) कुएं के जल में पहुंचने और पेयजल को दूषित करने की आशंका बनी हुई है।

ओपन वेल और नाली के पास एक कुंडी भी बनी पाई गई, जिसमें नाली का दूषित पानी इकट्ठा हो रहा है। आशंका जताई गई कि वाल्व (Valve) के माध्यम से यह दूषित पानी मुख्य पेयजल आपूर्ति लाइन में मिल सकता है।

निरीक्षण के दौरान सड़क पर सरस डेरी के पास बनाए गए गंदे नाले के स्थान पर जल आपूर्ति पाइपलाइन में लीकेज की संभावना भी सामने आई। टीम ने इस स्थिति को बेहद संवेदनशील माना है।

प्रयोगशाला टीम की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि दूषित पानी को पीने के पानी में मिलने से रोकने के लिए सामने आई कमियों और लीकेज को तत्काल दुरुस्त कराना अत्यंत आवश्यक है। जलापूर्ति व्यवस्था में इन संभावित स्रोतों को ठीक करना आमजन को शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

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