बेगूं में पर्युषण पर्व 8 सितंबर से: 8 दिन तक होंगे धार्मिक आयोजन
जैन समाज के आठ दिवसीय पर्व में रोजाना स्नात्र पूजा, कल्पसूत्र वाचन और प्रतिक्रमण होगा, संवत्सरी पर क्षमायाचना के साथ समापन होगा।
तस्वीर में सफेद वस्त्र धारण किए तीन जैन साध्वियां आसन पर बैठी नजर आ रही हैं।
बेगूं में जैन समाज का आठ दिवसीय पावन पर्युषण पर्व 8 सितंबर से शुरू होकर 15 सितंबर तक श्रद्धा, भक्ति और तपस्या के साथ मनाया जाएगा। पर्व के दौरान जैन समाज में व्रत, उपवास, त्याग, तपस्या, स्वाध्याय, आध्यात्मिक आत्मचिंतन और धार्मिक शास्त्रों के अध्ययन सहित विभिन्न धार्मिक गतिविधियां होंगी।
पर्युषण पर्व जैन समाज के लिए बड़े धार्मिक त्योहार के समान माना जाता है। इन आठ दिनों में श्रद्धालु साधु-संतों के सानिध्य में धार्मिक गतिविधियों में भाग लेंगे। रात में भोजन का त्याग, जमीकंद का त्याग और संयमित जीवनशैली अपनाकर साधु-संतों जैसा जीवन जीने का प्रयास किया जाएगा। इस दौरान धार्मिक प्रवचन, चर्चा और ज्ञानवर्धक कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।
नगर के श्री पार्श्वनाथ मंदिर में मूर्ति पूजन संघ की ओर से आठ दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम होंगे। इसके तहत प्रतिदिन सुबह 7:30 बजे स्नात्र पूजा, सुबह 9 बजे कल्पसूत्र वाचन और रात्रि 8:15 बजे भक्ति-भजन संध्या आयोजित की जाएगी।
पर्युषण पर्व के दौरान प्रतिदिन प्रातः 6:30 बजे प्रार्थना, 8:30 बजे अंतगढ़दशांग वाचन और 9:30 बजे से 11 बजे तक प्रवचन होंगे। दोपहर 2 से 3:30 बजे तक धार्मिक चर्चा, सूर्यास्त के बाद 7 बजे प्रतिक्रमण और रात 8:30 बजे ज्ञान चर्चा आयोजित की जाएगी।
पर्व के तीसरे दिन की धारणा के बाद अगले दिन महिलाओं द्वारा विशेष चुनर वेशभूषा धारण की जाएगी। इस अवसर पर महिलाएं उपवास रखकर धार्मिक साधना करेंगी।
आठ दिवसीय पर्युषण पर्व के समापन पर संवत्सरी महापर्व मनाया जाएगा। जैन समाज में इसे अत्यंत महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु वर्षभर में जाने-अनजाने में हुई अपनी भूलों और गलतियों के लिए एक-दूसरे से क्षमा मांगेंगे और “मिच्छामि दुक्कड़म्” कहकर परस्पर क्षमायाचना करेंगे।
पर्युषण पर्व आत्मशुद्धि, संयम, त्याग, तपस्या और क्षमाभाव का संदेश देता है। 8 से 15 सितंबर तक होने वाले धार्मिक आयोजनों को लेकर बेगूं के जैन समाज में विशेष उत्साह और श्रद्धा का वातावरण रहेगा।