कोरपना नगर पंचायत: सफाईकर्मियों के पीएफ और वेतन में अनियमितता की जांच शुरू
सहायक आयुक्त कार्यालय की निरीक्षक ने ठेकेदारों से दस्तावेज मांगे, 4 महीने से वेतन रुका होने का खुलासा
कोरपना नगर पंचायत में सफाईकर्मियों के पीएफ और वेतन घोटाले की जांच करते अधिकारी।
चंद्रपुर जिले की कोरपना नगर पंचायत में सफाईकर्मियों के भविष्य निर्वाह निधि (पीएफ) और वेतन में कथित अनियमितताओं का मामला गंभीर हो गया है। सफाईकर्मियों की शिकायतों पर सहायक आयुक्त एवं अमलबजावणी अधिकारी कार्यालय की निरीक्षक तृप्ति दोहे ने नगर पंचायत पहुंचकर जांच की। प्रारंभिक जांच में ठेकेदार एजेंसियों द्वारा कर्मचारियों की पीएफ राशि जमा करने में अनियमितता और आर्थिक नुकसान पहुंचाने के मामले सामने आए हैं। निरीक्षक ने संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगने और गंभीर गड़बड़ी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई करने के संकेत दिए हैं।
चंद्रपुर जिले में ठोस कचरा प्रबंधन में कथित अनियमितताओं और भविष्य निर्वाह निधि घोटाले को लेकर चर्चा में रही कोरपना नगर पंचायत में सफाईकर्मी वर्ष 2018-19 से ठोस कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, गंदे पानी की निकासी और मृत पशुओं के निस्तारण का काम कर रहे हैं। आरोप है कि पिछले कई वर्षों से भूषण इटनकर और रक्षक सिक्योरिटी नामक ठेकेदार एजेंसियों ने कर्मचारियों की पीएफ राशि के मामले में नियमों का पालन नहीं किया। प्रारंभिक जांच में कर्मचारियों को आर्थिक नुकसान पहुंचाने, अनियमितता बरतने और पीएफ राशि का कथित दुरुपयोग किए जाने की बात सामने आई है।
ठेकेदार भूषण इटनकर ने मोबाइल फोन पर 15 लाख रुपये पीएफ जमा करने की जानकारी दी। हालांकि, भविष्य निर्वाह निधि कानून के अनुसार राशि जमा करने के प्रमाण के तौर पर संबंधित कार्यालय में चालान और आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए। इस संबंध में नगर पंचायत के मुख्याधिकारी राम रावते से पूछताछ की गई। उन्होंने बताया कि ठेकेदारों ने बिल प्रस्तुत किए हैं, लेकिन पीएफ जमा करने से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं दिए। इसी कारण पिछले तीन-चार महीनों से कर्मचारियों का वेतन रोका गया है।
निरीक्षक तृप्ति दोहे ने संबंधित ठेकेदारों से अनुबंध की प्रतियां, अभिलेख, वेतन पंजी, पीएफ चालान और यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) खातों से जुड़े सभी दस्तावेज जांच के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। हालांकि, जांच के समय दोनों ठेकेदार उपस्थित नहीं हुए। निरीक्षक ने इस अनुपस्थिति और दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जाने को गंभीरता से लेते हुए कहा कि दोनों ठेकेदारों को उनके कार्यालय की ओर से पत्र जारी किया जाएगा। गंभीर स्तर का गैरव्यवहार सामने आने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नगर पंचायत प्रशासन को भी ठेकेदारों को आवश्यक निर्देश देकर सभी दस्तावेज प्राप्त करने और कार्यालय में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया। स्वास्थ्य निरीक्षक शंकर तांड्रा से भी पीएफ जमा होने की पुष्टि किए बिना ठेकेदारों के बिल प्रस्तुत किए जाने के संबंध में जानकारी मांगी गई। मुख्याधिकारी राम रावते को इस मामले में संपूर्ण जानकारी जुटाकर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
जांच के दौरान कर्मचारियों के कथित शोषण, चार महीने से वेतन नहीं मिलने और वेतन में अंतर जैसे मुद्दों को गंभीर माना गया। सरकारी नीति के अनुसार पीएफ की राशि प्रत्येक वेतन अवधि में जमा करना अनिवार्य है। इसके बावजूद आरोप है कि पिछले सात-आठ वर्षों से पीएफ राशि जमा करने और कर्मचारियों को इसकी जानकारी देने के मामले में लापरवाही बरती गई। निरीक्षक ने स्पष्ट संकेत दिए कि संबंधित एजेंसियों से जवाब मांगा जाएगा और अनियमितताएं साबित होने पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
निरीक्षक ने कर्मचारियों की मौजूदगी में नगर पंचायत कार्यालय में यह कार्रवाई संबंधी जानकारी दी और मामले का जल्द निपटारा करने के लिए आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही कर्मचारियों को उचित न्याय दिलाने का आश्वासन दिया गया।
इस दौरान राष्ट्रवादी कांग्रेस के प्रदेश सचिव आबिद अली, मुख्याधिकारी राम रावते, स्वास्थ्य निरीक्षक शंकर तांड्रा तथा सफाईकर्मी चरण पंधरे, आनंदराव आपटे, सुधाकर आत्राम, बंडू लसनते, पांडुरंग मेश्राम, संजय मालेकार, विशाल धोटे, दिंगाबर सांळके, राजु आत्राम और बादल भगत सहित अन्य कर्मचारी उपस्थित थे।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत में न्यूनतम वेतन कानून के अनुसार 24 हजार से 36 हजार रुपये तक वेतन दर्ज किया जाता है, लेकिन उनके हाथ में केवल 8 हजार से 10 हजार रुपये ही दिए जाते हैं। उन्होंने वेतन की इस कथित विसंगति और भविष्य निर्वाह निधि की राशि में अंतर के जरिए करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। कर्मचारियों ने यह भी शिकायत की कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कामगारों का शोषण और उनके साथ धोखाधड़ी हुई है।
पीएफ राशि जमा करने के प्रमाण, वेतन अभिलेखों और ठेकेदार एजेंसियों की भूमिका की जांच के बीच अब कोरपना नगर पंचायत के सफाईकर्मियों को अपने बकाया वेतन और भविष्य निर्वाह निधि के मामले में न्याय मिलने की उम्मीद है। इस प्रकरण पर क्षेत्र के नागरिकों की भी नजर बनी हुई है।