न्यायिक कर्मचारियों की हड़ताल: समान वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन
मुंबई उच्च न्यायालय की समिति की सिफारिशें लागू न होने से नाराज कर्मचारियों ने 17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है।
कोरपना न्यायालय में समान वेतन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करते कर्मचारी।
महाराष्ट्र के कोरपना में समान काम-समान वेतन की मांग को लेकर न्यायिक कर्मचारियों ने शासन के खिलाफ विरोध दर्ज कराया है। दिवाणी एवं फौजदारी न्यायालय, कोरपना के कर्मचारियों ने 16, 17 और 19 अक्टूबर को काली पट्टी बांधकर पूरे दिन काम किया। दुय्यम न्यायालयों के कर्मचारियों को भी वेतनवृद्धि का लाभ देने की मांग पर शासन की ओर से अब तक निर्णय नहीं लिए जाने के कारण कर्मचारियों ने यह विरोध प्रदर्शन किया।
कर्मचारियों की मांग है कि मुंबई उच्च न्यायालय के कर्मचारियों को लागू की गई वेतनवृद्धि के अनुरूप समान काम-समान वेतन के सिद्धांत के तहत दुय्यम न्यायालयों के कर्मचारियों को भी वेतनवृद्धि लागू की जाए। इस संबंध में मुंबई उच्च न्यायालय की ओर से गठित विशेष समिति ने 31 जनवरी 2025 को शासन को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। कर्मचारियों ने रिपोर्ट में की गई सिफारिशों के अनुरूप वेतनवृद्धि देने की मांग की है।
रिपोर्ट सौंपे जाने के करीब 20 महीने बीत जाने के बावजूद शासन की ओर से अब तक कोई शासन निर्णय जारी नहीं किया गया है। इससे न्यायिक कर्मचारियों में नाराजगी है। इसी देरी के विरोध में दिवाणी एवं फौजदारी न्यायालय, कोरपना के कर्मचारियों ने काली पट्टी बांधकर नियमित न्यायालयीन कामकाज जारी रखा और शासन के प्रति अपना विरोध जताया।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि शासन ने उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। इसके तहत 5 नवंबर 2026 को महाराष्ट्र के दुय्यम न्यायालयों के कर्मचारी सामूहिक अवकाश लेकर विरोध दर्ज कराएंगे। इसके बाद भी मांग पूरी नहीं होने पर 17 नवंबर 2026 से राज्य के करीब 34 हजार दुय्यम न्यायालयीन कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।
समान काम-समान वेतन की मांग को लेकर शुरू हुआ यह आंदोलन अब आगे बढ़ने की चेतावनी तक पहुंच गया है। सामूहिक अवकाश और अनिश्चितकालीन हड़ताल के प्रस्ताव से आगामी दिनों में न्यायालयीन कामकाज प्रभावित होने की आशंका है। ऐसे में कर्मचारियों की वेतनवृद्धि की मांग पर शासन क्या निर्णय लेता है, इस पर राज्यभर के न्यायिक कर्मचारियों की नजरें टिकी हैं।