राजुरा-गोविंदपुर हाईवे पर मैकेनाइज्ड सफाई: महाराष्ट्र में पहला प्रयोग
राष्ट्रीय राजमार्ग 353 बी पर आधुनिक स्वीपर मशीन से सफाई शुरू हुई है, जिससे दो राज्यों के बीच सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त सफर को बढ़ावा मिलेगा।
महाराष्ट्र और तेलंगाना को जोड़ने वाले राजुरा-गोविंदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर मैकेनाइज्ड रोड स्वीपर मशीन से सड़क की सफाई की व्यवस्था शुरू की गई।
कोरपना। महाराष्ट्र और तेलंगाना को जोड़ने वाले राजुरा–गोविंदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 353 बी पर आधुनिक तकनीक से सफाई का नया प्रयोग शुरू किया गया है। हाईवे पर जमा धूल, मिट्टी और कचरे को हटाने के लिए ‘मैकेनाइज्ड रोड स्वीपर’ मशीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे महाराष्ट्र में अपनी तरह का पहला प्रयोग बताया जा रहा है। इस पहल से राजमार्ग की नियमित सफाई को गति मिलने के साथ सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल यातायात व्यवस्था को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाया गया है।
राजुरा से गोविंदपुर के बीच स्थित यह चार लेन वाला राष्ट्रीय राजमार्ग केवल दो राज्यों को जोड़ने वाला परिवहन मार्ग नहीं है, बल्कि आधुनिक सड़क निर्माण, यातायात सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सुविधाओं के कारण भी महत्वपूर्ण है। राजमार्ग के रखरखाव के लिए यांत्रिक सफाई मशीन का उपयोग इसी व्यवस्था का अहम हिस्सा है। पारंपरिक तरीके से सफाई की तुलना में मशीन की मदद से बड़े क्षेत्र की सफाई कम समय में की जा सकती है। इससे सड़क पर जमा धूल और कचरा हटाने में मदद मिल रही है।
56.180 किलोमीटर लंबा चार लेन का राजमार्ग
राजुरा–गोविंदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग की लंबाई 56.180 किलोमीटर है। इस मार्ग पर एक बड़ा पुल, 28 छोटे पुल, 66 कल्वर्ट और तीन वाहन अंडरपास बनाए गए हैं। वाहन चालकों का सफर सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए स्पष्ट रोड मार्किंग, दिशासूचक बोर्ड, क्रैश बैरियर, रेट्रो रिफ्लेक्टर और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा नॉइज बैरियर, वन्यजीवों के लिए अंडरपास, बस स्टॉप और शौचालय जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।
टोल प्लाजा के पास रेस्टोरेंट और कैफे की सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इससे लंबी दूरी की यात्रा करने वाले वाहन चालकों को आराम करने और जरूरी सुविधाएं प्राप्त करने में मदद मिलती है।
वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम
राजमार्ग का कुछ हिस्सा वन क्षेत्र से होकर गुजरता है। ऐसे में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष उपाय किए गए हैं। वन क्षेत्र में एलिवेटेड रोड, वन्यजीवों के लिए अंडरपास और वन्यजीव क्षेत्र की जानकारी देने वाले सूचना बोर्ड लगाए गए हैं। इन व्यवस्थाओं से वन्यजीवों और वाहनों के बीच संभावित टकराव कम करने में मदद मिल सकती है।
राजमार्ग के मध्य भाग में वृक्षारोपण किया गया है। इससे रात के समय सामने से आने वाले वाहनों की रोशनी का सीधा असर कम करने में भी मदद मिलती है। पेड़ों के संरक्षण के लिए हर 10 किलोमीटर पर बोरवेल की व्यवस्था की गई है। राजमार्ग निर्माण के दौरान नालों को गहरा किया गया है। बारिश के पानी को संचित करने के लिए 120 स्थानों पर वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही राजमार्ग के निर्माण के दौरान 55 हजार से अधिक पेड़ लगाए जाने या उनका पुनः रोपण किए जाने की जानकारी दी गई है।
दुर्घटना होने पर 15 से 20 मिनट में एंबुलेंस उपलब्ध कराने की व्यवस्था
राजमार्ग पर दुर्घटना होने की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए एंबुलेंस की सुविधा रखी गई है। दुर्घटना की सूचना मिलने के बाद लगभग 15 से 20 मिनट में एंबुलेंस उपलब्ध कराने की व्यवस्था होने की बात कही गई है। आपातकालीन सहायता के लिए 1033 हेल्पलाइन नंबर भी उपलब्ध है। इसके अलावा राजमार्ग पर नियमित गश्त की जाती है।
यात्रा के दौरान वाहन खराब होने, ईंधन समाप्त होने या अन्य तकनीकी समस्याएं आने पर सहायता उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है। सड़क पर मेटल बीम क्रैश बैरियर लगाए गए हैं। वाहन के अनियंत्रित होने की स्थिति में गंभीर दुर्घटना का जोखिम कम करने के लिहाज से इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
दो राज्यों के बीच आवागमन को गति, उद्योगों को भी बढ़ावा
राजुरा–गोविंदपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच आवागमन अधिक सुगम हुआ है। इस मार्ग से यात्रा के समय और दूरी की बचत होने में मदद मिल रही है। साथ ही माल परिवहन को भी गति मिलने की उम्मीद है। राजमार्ग के आसपास उद्योगों, वेयरहाउस, पेट्रोल पंप और लॉजिस्टिक हब जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की स्थापना को बढ़ावा मिल रहा है।
मैकेनाइज्ड रोड स्वीपर के जरिए सफाई, वन्यजीव संरक्षण, वर्षाजल संचयन और दुर्घटना के समय त्वरित सहायता जैसी व्यवस्थाएं इस राजमार्ग के रखरखाव और यातायात सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को सामने लाती हैं। आधुनिक तकनीक से नियमित सफाई का यह प्रयोग राजमार्ग को स्वच्छ रखने और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।