किसानों की जमीन पर अतिक्रमण: बिगर सातबारा संगठन ने दी चेतावनी
कोरपना तहसील के गांवों में कृषि भूमि अतिक्रमण के लंबित प्रस्तावों पर कार्रवाई न होने से किसानों को हो रहा आर्थिक नुकसान।
तस्वीर में बिगर सातबारा शेतकरी संघटना के बैनर के साथ पदाधिकारी और किसान खड़े हैं।
कोरपना तहसील के अंतर्गत मांडवा, पारडी, रुपापेठ और कोठडा गांवों में किसानों की कृषि भूमि पर अतिक्रमण के मामले गंभीर होते जा रहे हैं। इन मामलों में प्रस्ताव लंबे समय से लंबित होने और समय पर कार्रवाई नहीं होने से किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिगर सातबारा किसान संगठन ने प्रशासन से इन मामलों में तत्काल कार्रवाई कर लंबित प्रकरणों का निपटारा करने की मांग की है। संगठन ने मांग की अनदेखी होने पर तीव्र आंदोलन करने की चेतावनी भी दी है।
इस संबंध में हाल ही में नागपुर में बिगर सातबारा किसान संगठन की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में संगठन के प्रणेता भाई जगदीश कुमार इंगले का विशेष मार्गदर्शन मिला। इस दौरान चंद्रपुर जिला अध्यक्ष रामदास कुमरे और जिला महासचिव आशिष निरंजने ने किसानों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की।
बैठक में कोरपना तहसील कार्यालय के अंतर्गत आने वाले मांडवा, पारडी, रुपापेठ और कोठडा गांवों में कृषि भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े लंबित प्रस्तावों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। इन प्रस्तावों पर समय पर कार्रवाई नहीं होने के कारण किसानों को भारी मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। साथ ही, उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
किसानों के अधिकारों की रक्षा और उनकी समस्याओं को प्रमुखता से उठाने के लिए प्रतिबद्ध बिगर सातबारा किसान संगठन ने प्रशासन से इन मामलों को गंभीरता से लेने और तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने का आह्वान किया। संगठन का कहना है कि किसानों को उनके न्यायसंगत अधिकार दिलाने और उनकी समस्याओं का समाधान कराने के लिए वह लगातार प्रयासरत रहेगा।
संगठन के पदाधिकारियों ने आश्वासन दिया कि किसानों के विकास और उनके न्यायोचित अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा। जब तक किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक संगठन का आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही, प्रशासन द्वारा मांग की अनदेखी किए जाने पर तीव्र आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी गई। बैठक में संगठन के कई पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।