चंद्रपुर: रूपापेठ में अधूरा बंधारा, गेट न लगने से पानी का संचयन ठप
ठेकेदार की लापरवाही से नाले का पानी सीधे बहकर निकल रहा है, जिससे आगामी गर्मियों में कोरपना तालुका में गंभीर जल संकट गहराने की आशंका है।
चंद्रपुर जिले के कोरपना तालुका के रूपापेठ गांव के पास नाले पर बंधारे का निर्माण पूरा होने के बावजूद लोहे के गेट नहीं लगाए गए हैं। निर्माण कार्य की निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी गेट नहीं लगने से पानी का भंडारण नहीं हो पा रहा है। इससे आसपास के गांवों के किसानों और ग्रामीणों को सिंचाई तथा जलस्तर बढ़ाने के लिए बनाए गए बंधारे का लाभ नहीं मिल रहा है। ठेकेदार की लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है और उन्होंने तत्काल गेट लगाने की मांग की है।
चंद्रपुर जिले के कोरपना तालुका स्थित रूपापेठ गांव के पास से गुजरने वाले नाले पर प्रशासनिक मंजूरी के बाद बंधारे का निर्माण कराया गया था। इसका उद्देश्य रूपापेठ और आसपास के गांवों के खेतों में भूजल स्तर बढ़ाना तथा कृषि कार्यों के लिए सिंचाई का पर्याप्त पानी उपलब्ध कराना था। हालांकि, बंधारे का सीमेंट निर्माण पूरा होने के बावजूद उसमें अब तक लोहे के गेट यानी फाटक नहीं लगाए गए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित ठेकेदार ने बंधारे का केवल ढांचा तैयार किया और शेष महत्वपूर्ण काम अधूरा छोड़ दिया। नाले में पानी होने के बावजूद उसे रोकने की व्यवस्था नहीं होने से पानी सीधे बहकर निकल रहा है। इसके कारण लाखों लीटर पानी का उपयोग नहीं हो पा रहा है और सरकारी धन से तैयार बंधारे का उद्देश्य पूरा नहीं हो रहा है।
रूपापेठ के एक स्थानीय किसान ने नाराजगी जताते हुए कहा, "सरकार ने निधि मंजूर कर बंधारा बनवाया, लेकिन समय पर गेट नहीं लगाए जाने से पानी की एक बूंद भी जमा नहीं हो रही है। इससे कोरपना तालुका के इस क्षेत्र में गर्मियों के दौरान गंभीर जल संकट पैदा होने की आशंका है।"
ग्रामीणों के अनुसार, आने वाले दिनों में गांव और खेतों में पानी की कमी का गंभीर सामना करना पड़ सकता है। बंधारे में पानी का भंडारण नहीं होने से सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने और आसपास के क्षेत्र में जलस्तर बढ़ाने का उद्देश्य प्रभावित हो रहा है।
ऐसे में रूपापेठ के ग्रामीणों ने संबंधित प्रशासनिक विभाग और ठेकेदार से बिना किसी देरी के बंधारे में लोहे के गेट लगाने तथा जल भंडारण शुरू कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि समय पर गेट नहीं लगाए जाने से बंधारे का लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि आगामी गर्मियों में पानी की उपलब्धता उनके लिए महत्वपूर्ण होगी।A