रक्षाबंधन पर आचार्य पुलकसागर का संदेश, हर बहन को समान सम्मान देने का भाई लें वचन
आचार्य पुलकसागर ने रक्षाबंधन पर हर बहन को सम्मान देने, बेटियों की रक्षा और धर्म, समाज व राष्ट्र की सुरक्षा का संकल्प दिलाया।
तस्वीर में भीलवाड़ा के एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति आचार्य पुलकसागर महाराज की पिच्छिका पर रक्षासूत्र बांधते हुए दिखाई दे रहा है।
रक्षाबंधन केवल बहन की रक्षा का वचन लेने का पर्व नहीं, बल्कि हर बहन और बेटी की रक्षा, परिवार, धर्म, समाज एवं राष्ट्र की सुरक्षा का संकल्प लेने का अवसर है। राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने रक्षाबंधन महोत्सव के अवसर पर भाइयों से अपनी बहनों के साथ-साथ समाज की हर बेटी को समान इज्जत और सम्मान देने का वचन लेने का आह्वान किया।
भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे आचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत शुक्रवार को रक्षाबंधन महोत्सव में प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि बहनें राखी बांधते समय भाई से वचन मांगें कि जैसा सम्मान उन्हें दिया जाता है, वैसा ही सम्मान घर के बाहर भी हर बहन को दिया जाएगा।
आचार्यश्री ने कहा कि रक्षाबंधन पर अपने परिवार, धर्म, समाज एवं राष्ट्र की रक्षा का संकल्प लेना चाहिए। धर्मस्थलों की रक्षा का संकल्प भी लेना चाहिए। सनातन धर्म और जैन धर्म को मानने वालों को एक-दूसरे के तीर्थस्थलों और धार्मिक स्थलों की रक्षा एवं सम्मान करने का संकल्प लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन धर्मों में से एक भी मिट गया तो भारत से आध्यात्म मिट जाएगा।
उन्होंने कहा कि बेटियां बेटों के समान स्वतंत्रता से घूमें, लेकिन इसका अर्थ स्वच्छंद होना नहीं है। नारी को अपनी मर्यादा में रहते हुए स्वतंत्र रहने का प्रयास करना चाहिए। हमारी बेटियां मिस वर्ल्ड या यूनिवर्स बनने की बजाय सीता, अनुसूया और चंदनबाला जैसी सती बनने का सपना देखें। तीर्थंकरों और महापुरुषों का सपना है कि इस देश में वासना और अश्लीलता नहीं, बल्कि साधना की महक फैले।
आचार्य पुलकसागर ने कहा कि आज राखी बांधते समय भाई से एक वचन अवश्य लिया जाए कि वह देश की हर बेटी को वही इज्जत और प्यार देगा, जो अपनी बहन को देता है और किसी भी बहन से छेड़छाड़ नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि दस सिर वाले रावण से नहीं, बल्कि उस रावण से डरना है जो हर कहीं घूमता मिल जाएगा और जिसकी आंखें भले दो हों, लेकिन नजर कई पर होती है। रावण को जलाना आसान है, लेकिन राम बनना मुश्किल है।
आचार्यश्री ने कहा कि देश की बेटियों की रक्षा करनी है और निर्भया कांड जैसी घटनाओं को रोकना है तो कानून को सख्त बनाना होगा तथा हर बलात्कारी एवं दुष्कर्मी को फांसी के फंदे पर लटकाना होगा। उन्होंने कहा कि दुष्कर्म करने वाले दूसरों के बेटों के लिए फांसी मांगने और ऐसा कृत्य करने वाले अपने बेटे को बचाने की दोहरी सोच का त्याग करना होगा। रक्षाबंधन पर यह संकल्प लेना होगा कि यदि अपनी औलाद गलत कार्य करेगी तो वही सजा मांगी जाएगी, जो दूसरों के लिए मांगी जाती है। उन्होंने कहा कि जब तक ऐसा नहीं करेंगे, हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं होंगी। जो आज दूसरों की बेटी के साथ हो रहा है, वह कल आपकी बेटी के साथ भी हो सकता है।
उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर्व इतिहास की उस घटना की भी याद दिलाता है, जब हस्तिनापुर में राजा बालि ने 700 मुनियों को प्रताड़ित कर बंदी बना लिया था और मुनियों पर आए घोर उपसर्ग से विष्णुकुमार मुनि ने वामन बनकर रक्षा की थी। इसलिए इस दिन मुनि रक्षा का संकल्प भी लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई लोग मुनियों को भी पागल कहते हैं तो यह गलत नहीं है। पागल वह होता है जो पाप को गलाने में लगा होता है। संत पाप को गलाते हैं और श्रावक पापों में गलता है।
आचार्यश्री ने कहा कि यह संकल्प लेना चाहिए कि जितना प्रेम हम अपने भाई-बहन से करते हैं, उतना ही प्रेम इस देश की रक्षा करने वाले सैनिकों, धर्म, समाज एवं राष्ट्र से भी करेंगे।
प्रवचन समाप्ति पर आचार्य पुलकसागर महाराज की पिच्छिका पर प्रथम राखी के रूप में स्वर्ण राखी बांधने का पुण्यार्जन पारसमल, महावीर और राहुल चौधरी परिवार ने प्राप्त किया। आचार्यश्री की सांसारिक बहन मंजूदेवी एवं बहनोई शिरीष जैन ने भी उनकी पिच्छिका पर रक्षासूत्र बांधा। पुण्यार्जक चौधरी परिवार ने सभी आचार्य ससंघ की पिच्छिकाओं पर भी रक्षासूत्र बांधने का सौभाग्य प्राप्त किया। पुण्यार्जक चौधरी परिवार का स्वागत पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा आदि पदाधिकारियों ने किया।
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य दिलीप, प्रवीण, नवीन और राहुल चौधरी परिवार ने प्राप्त किया। सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति द्वारा किया गया। बालिका मंडल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार दोपहर शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में आचार्य पुलकसागर ससंघ के साथ रक्षाबंधन पर्व मनाने के लिए कई श्रावक-श्राविकाएं परिवार सहित पहुंचे। इन श्रावकों ने धर्म रक्षा संकल्प के साथ आचार्य ससंघ की पिच्छिका पर रक्षासूत्र बांधा और उनकी रक्षा का संकल्प लिया। दीपक और श्रीफल के साथ राखी लेकर पहुंचे परिवारों को आचार्य ससंघ ने आशीर्वाद प्रदान किया। संगीत और आरती के साथ आनंद के माहौल में रक्षाबंधन पर्व मनाया गया।