तस्वीर में माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में आयोजित सत्संग के दौरान बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।


क्षाबंधन केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि जीवन में रक्षा का संकल्प लेने का अवसर है। परमात्मा भक्त की, समर्थ कमजोर की, धनवान निर्धन की और गुरु अपने शिष्य की रक्षा करें। रक्षा के बंधन में बड़ी ताकत होती है और इसके बल पर हर शुभ कार्य सिद्ध हो सकते हैं। यह विचार अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय शाहपुरा के पीठाधीश्वर जगद्गुरु आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘विश्व शांति कल्याण’ चातुर्मास के तहत शुक्रवार को रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित सत्संग में व्यक्त किए।

आचार्यश्री ने कहा कि जहां बंधन होता है, वहीं मुक्ति भी होती है। संसार का बंधन है तो संसार से मुक्ति भी है। जो बंधन में नहीं बंधते, वे भटकते रहते हैं। रक्षाबंधन रक्षा का संकल्प लेने का अवसर है। जो व्यक्ति राम के बंधन में आता है, वह आत्मचिंतन कर मुक्ति प्राप्त कर लेता है।

उन्होंने कहा कि वैदिक सनातन परंपरा में चार मुख्य पर्व रक्षाबंधन, दशहरा, दीपावली एवं होली बताए गए हैं। इनमें प्रेम और स्नेह का प्रतीक रक्षाबंधन पर्व विशिष्ट महत्व रखता है। राखी बांधते समय हर बहन की एक ही आकांक्षा होती है कि उसका भाई सदैव स्वस्थ और मस्त रहे। राखी का धागा अनमोल होता है।

आचार्यश्री ने कहा कि राखी का धागा उसी को समर्पित किया जाता है, जो रक्षा करता है। इसलिए भक्त भगवान के चरणों में राखी समर्पित कर अपने रक्षक के प्रति श्रद्धाभाव व्यक्त करते हैं और कामना करते हैं कि जब तक शरीर है, परमात्मा उसकी रक्षा करें।

आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि लोग जिनके प्रति श्रद्धा और आस्था का भाव रखते हैं, उन्हें भी राखी बांधते हैं। इसी कारण कई लोग संतों को भी राखी बांधते हैं। रक्षाबंधन प्रदर्शन का नहीं, बल्कि आत्मदर्शन का पर्व है। जिनसे भी रक्षा की उम्मीद होती है, उन्हें राखी बांधी जाती है। राखी बंधवाने वाला भाई अंतिम श्वास तक रक्षा का वचन प्रदान करता है।


 


 


उन्होंने कहा कि रक्षाबंधन पर्व से जुड़ी कई कथाएं हैं, जो इसके पौराणिक महत्व को बताती हैं। यह रक्षा का संकल्प लेने का पर्व है, जिसे सभी को उल्लास के माहौल में पावन भाव के साथ मनाना चाहिए।

आचार्यश्री से पूर्व अंतरराष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन किया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं ने आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में चातुर्मास के दौरान प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। वहीं सूर्यास्त के समय संध्या आरती और रामस्नेही संप्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

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