संघ प्रमुख भागवत से आचार्य पुलकसागर की चर्चा, जैन तीर्थों के संरक्षण और UGC नियम पर उठे मुद्दे
भीलवाड़ा में डॉ. मोहन भागवत और आचार्य पुलकसागर के बीच UGC नियम, जैन तीर्थ संरक्षण और सामाजिक समरसता पर चर्चा हुई।
तस्वीर में मोहन भागवत और अन्य लोग एक संत के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।
भीलवाड़ा में चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज से दर्शन एवं धर्म चर्चा के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत सोमवार को चातुर्मास स्थल सूर्यमहल पहुंचे। करीब 40 मिनट तक चली चर्चा में राजनीति से हटकर सामाजिक एकता, समरसता, जैन तीर्थों के संरक्षण और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर मंथन हुआ।
चर्चा के दौरान आचार्य पुलकसागरजी महाराज ने देश में सामाजिक समरसता हर हाल में कायम रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि स्वर्ण एवं पिछड़ा वर्ग को तोड़ने का प्रयास साबित हो रहे UGC नियम लागू नहीं होने चाहिए। उन्होंने जैन समाज की आस्था के प्रमुख केन्द्र तीर्थस्थल सम्मेद शिखरजी एवं गिरनार जैसे तीर्थस्थलों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित करने का मुद्दा भी डॉ. मोहन भागवत के समक्ष उठाया।
आचार्यश्री ने बताया कि बातचीत में डॉ. भागवत ने आश्वस्त किया कि UGC नियम अभी केवल प्रस्ताव है और उसे कानूनी रूप नहीं दिया गया है। वर्तमान प्रारूप में ऐसा कानून नहीं बने, इसके लिए सरकार के स्तर पर चर्चा चल रही है। जैन तीर्थों के संरक्षण में आ रही चुनौतियों पर आचार्यश्री ने पीड़ा जाहिर की। इस पर भागवत ने उचित स्तर पर चर्चा करने और समस्याओं के समाधान का विश्वास दिलाया।
बातचीत के दौरान आचार्य पुलकसागर महाराज ने सुझाव दिया कि देश की जेलों में गौशालाएं खोली जानी चाहिए, ताकि बंदियों को गौवंश संवर्धन के कार्य से जोड़ा जा सके।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि राजनीति से हटकर सामाजिक समरसता के मुद्दों पर हुई चर्चा के दौरान इस बात पर सहमति थी कि हमारा और उनका उद्देश्य एक ही है कि समाज में शांति व सद्भाव बना रहे और जातिवाद से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण में सहयोग रहना चाहिए।
इस दौरान डॉ. भागवत ने आचार्यश्री के साथ हाल ही की अपनी अमरीका व ब्रिटेन यात्रा से जुड़े अनुभव भी साझा किए। चर्चा के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केन्द्रीय पदाधिकारी अरूण जैन, निम्बाराम, मुरलीधर एवं श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी मौजूद रहे।
सूर्यमहल पहुंचने के बाद डॉ. भागवत ने सबसे पहले आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन किया और वंदन-अभिनंदन किया। आचार्यश्री ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करने में आरएसएस की भूमिका अहम है।
इस अवसर पर डॉ. भागवत ने इन्दौर की सरोज शाह द्वारा आचार्य पुलकसागर के प्रेरणादायी जीवन पर लिखित पुस्तक ‘‘एक और मुक्तिदूत’’ का विमोचन भी किया और उसे आचार्यश्री के चरणों में समर्पित किया।
इससे पूर्व सूर्यमहल पहुंचने पर आचार्यश्री का स्वागत करने वालों में चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, तिलोकचंद छाबड़ा, मनीष शाह, लोकेश अजमेरा, जयकुमार पाटनी, सुभाष जैन, अनिल जैन, सुरेशकुमार जैन, प्रेमचंद जैन, कमलचंद जैन, लोकेन्द्रकुमार जैन, कांतिलाल जैन और अतुलकुमार जैन शामिल थे।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि वर्ष 2011 में भी आचार्य पुलकसागर के भीलवाड़ा प्रवास के दौरान संघ प्रमुख भागवत उनसे मिलने आए थे और नियमित अन्तराल पर उनका आचार्यश्री से मिलना होता रहता है। सोमवार की यह मुलाकात भी सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और जैन तीर्थों के संरक्षण जैसे विषयों पर केंद्रित रही।