भीलवाड़ा में आचार्य पुलकसागर से मिलेंगे मोहन भागवत, धर्म-सामाजिक विषयों पर होगी चर्चा
भीलवाड़ा में आचार्य पुलकसागर से मोहन भागवत की मुलाकात होगी। धार्मिक, सामाजिक और समसामयिक विषयों पर करीब एक घंटे चर्चा होगी।
तस्वीर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज से दर्शन एवं धर्म चर्चा के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत सोमवार को भीलवाड़ा आएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भागवत सुबह 11 बजे शास्त्रीनगर स्थित आचार्य पुलकसागरजी के प्रवास स्थल सूर्यमहल पहुंचेंगे। यहां श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति की ओर से उनका स्वागत-अभिनंदन किया जाएगा।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि मोहन भागवत और आचार्य पुलकसागरजी महाराज के बीच करीब एक घंटे तक विभिन्न धार्मिक, सामाजिक एवं समसामयिक विषयों पर विचार-विमर्श होगा। संघ प्रमुख के आगमन के दौरान चातुर्मासिक प्रवचन सुनने आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी नहीं हो, इसके लिए सोमवार को प्रवचन का समय सुबह 8.30 से 9.30 बजे तक रखा गया है। प्रवेश एवं निकासी के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है।
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से आचार्य पुलकसागरजी महाराज का भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास आयोजित हो रहा है। इसी क्रम में रविवार को चातुर्मासिक प्रवचन में आचार्यश्री ने शुद्धोपयोगी और शुभोपयोगी में अंतर समझाया। उन्होंने कहा कि मुनि और श्रावक का धर्म अलग-अलग होता है। आराध्य को जानने पर ही आराधक बन पाएंगे। दीक्षा लेने पर सभी मुनि बनते हैं, जबकि आचार्य एवं उपाध्याय का भी मूल पद साधु ही होता है।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि चौथे काल तक हुए शुद्धोपयोगी मुनि प्रवचन नहीं देते थे, बल्कि कर्म क्षय कर मोक्ष चले जाते थे। वर्तमान पांचवें काल का आचार्य भी शुद्धोपयोगी मुनि को प्रणाम करता है। वर्तमान में श्रावकों के कल्याण का मार्ग शुभोपयोगी मुनि ही बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के मोक्ष जाने के बाद पिछले करीब 2600 वर्ष से पंचम काल प्रारंभ हुआ है। इस काल के मुनियों में रिद्धि नहीं होती और वे शुद्धोपयोगी नहीं होते हैं। जो मुनि होते हैं, वे कर्म क्षय की प्रार्थना करते हैं, जबकि संसारी पाप क्षय की प्रार्थना करते हैं।
आचार्यश्री ने कहा कि भगवान देने में कभी कमी नहीं रखते, लेकिन हम ले नहीं पाते हैं। पर्युषण पर्व आने वाला है और ईश्वर की कृपा पाने के लिए स्वयं को पात्र बनाना होगा। इसके लिए ताकत जुटानी होगी। उन्होंने कहा कि ईश्वर की कृपा पाने के लिए सप्त कुव्यसनों का त्याग, रात्रि भोजन का त्याग सहित बुराइयों को छोड़ना पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि गृहस्थ रहते हुए व्यवहारिक जीवन में समझौते करने पड़ते हैं, लेकिन यह संकल्प अवश्य करना चाहिए कि धर्म क्षेत्र में झूठ नहीं बोलेंगे और पाप नहीं करेंगे। गुरु के समक्ष और मंदिर में झूठ नहीं बोलेंगे। उन्होंने कहा कि व्यापार में हिंसा क्षम्य हो सकती है, लेकिन हिंसा का व्यापार नहीं हो सकता। व्यापार में झूठ हो सकता है, लेकिन झूठ का व्यापार नहीं किया जा सकता। मिट्टी को सोना बताकर बेचना झूठ का व्यापार है।
आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में पर्युषण यानी दशलक्षण पर्व की साधना 16 से 25 सितम्बर तक सूर्यमहल में होगी। इस अवधि में आयोजित होने वाले दस दिवसीय पाप नाशनम शिविर के लिए सैकड़ों श्रावक-श्राविकाओं ने पंजीयन कराया है।
प्रवचन के प्रारंभ में श्रावकों द्वारा दीप प्रज्वलन किया गया। इसके बाद आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट किया गया। चातुर्मास समिति के संयोजक मनीष शाह एवं सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रतिदिन शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।