हिंदुस्तान जिंक: रामपुरा आगुचा में माइन शाफ्ट वाइंडर सिस्टम पर कार्यशाला
डीजीएमएस के तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला में खनन विशेषज्ञों ने एआई, आईओटी सेंसर और रिमोट मॉनिटरिंग के जरिए भूमिगत खदान सुरक्षा मजबूत करने पर मंथन किया।
तस्वीर में रामपुरा आगुचा खदान कार्यशाला के दौरान समूह में बैठे और खड़े अधिकारी।
भीलवाड़ा, 30 सितंबर 2026। भूमिगत खदानों में सुरक्षा, तकनीकी नवाचार और वाइंडर सिस्टम के विश्वसनीय संचालन को लेकर हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने महानिदेशालय खान सुरक्षा (डीजीएमएस) के तत्वावधान में रामपुरा आगुचा खदान में माइन शाफ्ट वाइंडर सिस्टम्स पर विशेष कार्यशाला आयोजित की। कार्यशाला में 100 से अधिक खनन विशेषज्ञों, तकनीकी पेशेवरों और उद्योग प्रतिनिधियों ने सुरक्षा से जुड़े आधुनिक उपायों और तकनीकी समाधान पर मंथन किया।
दुनिया की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक एवं शीर्ष 10 चांदी उत्पादक कंपनी में से एक हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड की ओर से आयोजित इस कार्यशाला में डीजीएमएस के वरिष्ठ अधिकारी, खनन क्षेत्र के विशेषज्ञ, तकनीकी पेशेवर, उपकरण निर्माता कंपनियों के प्रतिनिधि और उद्योग जगत के विशेषज्ञ शामिल हुए। कार्यशाला का उद्देश्य भूमिगत खदानों में उपयोग होने वाले वाइंडर सिस्टम की सुरक्षा, विश्वसनीयता, डिजिटल तकनीकों के उपयोग और नियामकीय अनुपालन से जुड़ी नवीनतम जानकारियों तथा अनुभवों को साझा करना था। इस दौरान नियामक संस्थाओं, खनन कंपनियों और तकनीकी साझेदारों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान का मंच तैयार हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुरलीधर बिदारी, उप महानिदेशक खान सुरक्षा, नॉर्थ वेस्टर्न जोन थे। उन्होंने खदान सुरक्षा, नियमों के पालन और वाइंडर सिस्टम में लगातार तकनीकी उन्नयन की आवश्यकता पर विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि माइन वाइंडर की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नियमों का पालन, मजबूत इंजीनियरिंग, आधुनिक सुरक्षा प्रणालियां और निरंतर सीखने की संस्कृति जरूरी है। ऐसी कार्यशालाएं नियामकों, खदान संचालकों और तकनीकी विशेषज्ञों को साथ लाकर सुरक्षा मानकों को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
कार्यशाला में आईओटी आधारित सेंसर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत सिग्नलिंग सिस्टम, वाइंडर सिमुलेटर, डिजिटल मॉनिटरिंग, ब्रेक सिस्टम डिजाइन और इवेंट रिकॉर्डिंग सिस्टम जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने प्रिवेंटिव और प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस, एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स, रिमोट मॉनिटरिंग तथा अगली पीढ़ी के सुरक्षा समाधानों को लेकर भी अपने अनुभव साझा किए। वैश्विक स्तर पर हुई माइन वाइंडर घटनाओं से मिले सबक और भविष्य में सुरक्षा बढ़ाने के उपायों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यशाला में डीजीएमएस के वरिष्ठ अधिकारी टी. श्रीनिवास, प्रकाश कुमार, श्याम सुंदर सोनी, उमेश कुमार राव, विनोद राजक, के. रविंदर और रूपेश कुमार श्रीवास्तव उपस्थित थे। हिंदुस्तान जिंक के सीओओ किशोर एस. एवं आईबीयू सीईओ, रामपुरा आगुचा राम मुरारी सहित कंपनी के कई वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में वेकेश चित्तौड़ा, यूनिट हेड, रामपुरा आगुचा ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
कार्यशाला में हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, एबीबी, सिमेंस और सीआईटीआईसी के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इससे विभिन्न उद्योगों के बीच ज्ञान और अनुभव साझा करने का अवसर मिला। हिंदुस्तान जिंक सुरक्षित, विश्वसनीय और तकनीक-सक्षम भूमिगत खनन को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। कंपनी नियामक संस्थाओं, खनन कंपनियों और तकनीकी साझेदारों के साथ मिलकर खनन क्षेत्र में सुरक्षा और नवाचार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।