तस्वीर में चेक वाली शर्ट पहने एक व्यक्ति सफेद दीवार के सामने खड़ा है।

पोक्सो कोर्ट संख्या-1 की न्यायाधीश श्रीमती रेखा वधवा ने नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के गंभीर मामले में आरोपी मस्तराम गिरी को दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 42,000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। मामले में विशिष्ट लोक अभियोजक धर्मवीर सिंह कानावत ने अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी की।

प्रकरण के अनुसार घटना 13 नवंबर 2024 की रात की है। परिवादी ने फूलिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि रात में परिवार के सभी सदस्य कमरे में सो रहे थे। करीब 3 बजे उसकी नींद खुली तो घर का मुख्य गेट और कमरे का दरवाजा खुला हुआ था। उसकी नाबालिग पुत्री घर पर मौजूद नहीं थी। काफी तलाश के बाद भी जब उसका पता नहीं चला, तब इंस्टाग्राम पर मस्तराम गिरी निवासी लसाड़िया के साथ विवाह की फोटो दिखाई दी।

शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने पीड़िता को दस्तयाब किया, उसके और गवाहों के बयान लेखबद्ध किए तथा पीड़िता का मेडिकल मुआयना कराया। इसके बाद आरोपी मस्तराम गिरी को गिरफ्तार कर अनुसंधान पूरा किया गया और न्यायालय में चार्जशीट पेश की गई।

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक धर्मवीर सिंह कानावत ने प्रभावी पैरवी करते हुए अदालत में 34 दस्तावेज और 19 गवाह पेश किए। प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मस्तराम गिरी पुत्र सोहन लाल गिरी, जाति-गुसाईं, निवासी-लसाड़िया, थाना पंडेर के खिलाफ आरोप पूरी तरह साबित हुए।

पत्रावली का अध्ययन करने के बाद विशिष्ट न्यायाधीश, पोक्सो कोर्ट संख्या-1 ने आरोपी मस्तराम गिरी को दोषी माना। अदालत ने उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास के साथ 42,000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया। इस मामले में विशिष्ट लोक अभियोजक की प्रभावी भूमिका रही।

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