भीलवाड़ा में महात्मा गांधी अस्पताल की मातृ एवं शिशु इकाई के बाहर बने आश्रय पालना गृह में छोड़े गए डेढ़ किलो वजन के नवजात की मंगलवार दोपहर मौत हो गई। बाल कल्याण समिति ने मासूम को ‘सोम’ नाम दिया था। समय से पहले जन्म, कमजोर फेफड़ों और कड़ाके की ठंड के कारण उसकी हालत गंभीर बनी हुई थी। डॉक्टरों की विशेष टीम ने उसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन करीब 29 घंटे तक जिंदगी के लिए संघर्ष करने के बाद मासूम ने दम तोड़ दिया।

जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह महात्मा गांधी अस्पताल की मातृ एवं शिशु इकाई के बाहर लगे पालना गृह की घंटी बजी। आवाज सुनकर नर्सिंग स्टाफ और सुरक्षाकर्मी मौके पर पहुंचे तो पालने में कपड़ों में लिपटा एक नवजात मिला। ठिठुरती सुबह में अकेला छोड़ा गया बच्चा समय से पहले जन्मा था और उसका वजन महज 1.5 किलोग्राम था। नवजात की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्री-मैच्योरिटी और ठंड ने बढ़ाई गंभीरता

चिकित्सकों के अनुसार, समय से पहले जन्म होने के कारण नवजात के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए थे। इस वजह से उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी हो रही थी। कड़ाके की ठंड के प्रभाव ने उसकी स्थिति और नाजुक कर दी।

डॉक्टरों ने मासूम को नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) में भर्ती कर वेंटिलेटर, ऑक्सीजन और वार्मर पर रखा। चिकित्सकों की विशेष टीम लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। उसे बचाने के लिए सभी संभव चिकित्सकीय प्रयास किए गए, लेकिन उसकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका।

29 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच जंग

पालना गृह में मिलने के बाद सोम ने करीब 29 घंटे तक जिंदगी के लिए संघर्ष किया। सोमवार सुबह से शुरू हुई उसे बचाने की कोशिशें मंगलवार दोपहर तक जारी रहीं, लेकिन कमजोर फेफड़ों और ठंड के गंभीर प्रभाव के चलते उसकी सांसें थम गईं।

जिस पालना गृह में उसे सुरक्षित जीवन देने की उम्मीद के साथ रखा गया था, वहां से शुरू हुआ उसका सफर अस्पताल के एनआईसीयू में समाप्त हो गया। नवजात की मौत से अस्पताल में शोक और संवेदनशीलता का माहौल है।

भीमगंज पुलिस पूरी करेगी अंतिम संस्कार की प्रक्रिया

भीमगंज थाने के सहायक उप निरीक्षक जमना लाल ने बताया कि सोमवार सुबह महात्मा गांधी अस्पताल की मातृ एवं शिशु इकाई के बाहर बने पालना गृह में नवजात लावारिस हालत में मिला था। बाल कल्याण समिति ने बच्चे का नाम ‘सोम’ रखा था।

पुलिस की ओर से आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नियमानुसार नवजात का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

सोम की मौत ने खड़े किए कई सवाल

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर किन परिस्थितियों में एक नवजात को कड़ाके की ठंड में पालना गृह में अकेला छोड़ना पड़ा। क्या बच्चे को जन्म देने वाले माता-पिता के सामने ऐसी कोई मजबूरी थी, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा?

पालना गृह का उद्देश्य उन नवजातों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना है, जिन्हें उनके माता-पिता किसी कारणवश अपने साथ नहीं रख सकते। लेकिन सोम की मौत ने समय से पहले जन्मे और बेहद कम वजन वाले बच्चों के शुरुआती उपचार की चुनौती को भी सामने ला दिया है।

महज 1.5 किलोग्राम वजन के सोम को डॉक्टरों ने बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन 29 घंटे का संघर्ष उसकी जिंदगी नहीं बचा सका। जिस मासूम को अभी दुनिया देखनी थी, उसकी जिंदगी अस्पताल के एनआईसीयू में हमेशा के लिए खामोश हो गई।

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