भीलवाड़ा में 248 विद्यार्थियों के साथ बाल संस्कार शिविर का शुभारंभ, संस्कृति और आत्मरक्षा का मिलेगा प्रशिक्षण
भीलवाड़ा के रामेश्वरम में श्री महेश पब्लिक स्कूल की ओर से दो दिवसीय बाल संस्कार शिविर 2026 शुरू हुआ। 248 विद्यार्थियों की भागीदारी वाले इस आयोजन में योग, ध्यान, वैदिक खेल, मार्शल आर्ट और भजन संध्या जैसी गतिविधियां आयोजित की गईं।
तस्वीर में भीलवाड़ा में आयोजित श्री महेश पब्लिक स्कूल के बाल संस्कार शिविर 2026 के प्रतिभागी छात्र और अतिथि नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा में बच्चों को भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और आत्मनिर्भरता से जोड़ने के उद्देश्य से श्री महेश पब्लिक स्कूल, प्राइमरी विंग की ओर से दो दिवसीय बाल संस्कार शिविर 2026 का शुभारंभ किया गया। श्री महेश सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में कक्षा 3 से 5 तक के 248 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर की शुरुआत 3 नवंबर 2026 को रामेश्वरम, भीलवाड़ा में हुई।
श्री महेश सेवा समिति के कोषाध्यक्ष एवं विद्यालय प्रभारी राजेश जी बाहेती तथा निर्देशक एवं विद्यालय प्रभारी दिनेश जी शारदा के सानिध्य और मार्गदर्शन में आयोजित इस शिविर का उद्देश्य बच्चों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और भारतीय संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। शिविर में पहुंचे विद्यार्थियों का पारंपरिक तरीके से ढोल बजाकर और चंदन तिलक लगाकर स्वागत किया गया। इसके बाद दीप प्रज्वलन, मंत्रोच्चारण और प्रार्थना के साथ शिविर का विधिवत शुभारंभ हुआ।
उद्घाटन समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्माननीय रामपाल सोनी उपस्थित रहे। वहीं, मुख्य अतिथि के रूप में दक्षिणी राजस्थान प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम चेचाणी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राधेश्याम सोमाणी, नगर अध्यक्ष केदार जगेटिया, अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के कार्यकारी मंडल सदस्य जगदीश कोगटा, भीलवाड़ा जिला महेश सेवा निधि के मंत्री प्रहलाद लड्ढा, पूर्व सांसद सुभाष बाहेड़िया और श्री नगर माहेश्वरी सभा के सचिव सुरेश बिड़ला सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे।
इस अवसर पर समिति सचिव राजेंद्र कुमार कचौलिया, उपाध्यक्ष कृष्ण गोपाल जाखेटिया एवं सत्यनारायण मूंदड़ा, सह-सचिव प्रह्लाद राय हींगड़, कोषाध्यक्ष राजेश बाहेती तथा संचालक सदस्य ओम प्रकाश मालू, केदारमल जागेटिया, दिलीप तोषनीवाल, सुरेश चंद्र काबरा, चंद्र प्रकाश काल्या और दिनेश शारदा सहित अनेक गणमान्य सदस्य उपस्थित रहे। अतिथियों ने विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति, सेवा, अनुशासन और सदाचार के मूल्यों को अपने जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
शिविर के शैक्षणिक और रचनात्मक सत्रों में बच्चों के बौद्धिक, नैतिक और शारीरिक विकास पर विशेष ध्यान दिया गया। श्री योगेश जी लड्ढा ने बौद्धिक व्यायाम के माध्यम से विद्यार्थियों की एकाग्रता और चिंतन शक्ति बढ़ाने के अभ्यास करवाए। श्रीमती प्रिया जी आचार्य ने प्रेरक एवं शिक्षाप्रद कहानियों के माध्यम से बच्चों को नैतिक मूल्यों की सीख दी। वहीं, श्रीमती मधुबाला जी यादव ने देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर विद्यार्थियों में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत की।
बच्चों को आत्मरक्षा के गुर सिखाने के लिए दुर्गा शक्ति अखाड़ा की सुश्री यशोधरा जी मंडोवरा के सहयोग से मार्शल आर्ट, दंड अभ्यास और जूडो-कराटे का प्रशिक्षण दिया गया। इसके साथ ही बच्चों के शारीरिक विकास और आत्मरक्षा के लिए विशेष मार्शल आर्ट सत्र आयोजित किए गए। भारतीय परंपराओं से परिचित कराने के उद्देश्य से वैदिक खेलों का भी आयोजन हुआ।
रचनात्मक गतिविधियों के तहत कलादलन आर्ट्स की सुश्री बबीता बंसल ने 'वेव्स ऑफ क्रिएटिविटी' यानी 'रंग तरंग' गतिविधि आयोजित की। इसमें विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशक्ति और कलात्मक प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
शिविर में आयोजित भजन संध्या में नवीन राव और श्रीमती सरोज जैन के साथ बच्चों ने भक्तिभाव से भजनों का आनंद लिया। इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों के अभिभावक भी उपस्थित रहे। रात्रि प्रवास के दौरान भजन, ध्यान, प्रेरक कथाओं और समूह गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को सहयोग, आत्मनिर्भरता तथा मिल-जुलकर रहने का महत्व समझाया गया।
समिति के सचिव राजेंद्र कचोलिया, कोषाध्यक्ष राजेश बाहेती और निर्देशक एवं विद्यालय प्रभारी दिनेश शारदा ने कहा कि बच्चों को आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कारों की भी उतनी ही आवश्यकता है, क्योंकि संस्कारवान बालक ही एक अच्छे परिवार, समाज और राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य शिविर के माध्यम से दी गई सीख को बच्चों के जीवन में स्थायी स्थान दिलाना है।
विद्यालय की प्रधानाचार्या निधि झा भार्गव ने बताया कि शिविर के माध्यम से बच्चों को प्रार्थना, मंत्रोच्चार, योग, ध्यान, प्रेरणादायक कहानियों और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के जरिए भारतीय संस्कृति एवं जीवन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। दो दिवसीय इस आयोजन में शिक्षा के साथ संस्कार, अनुशासन, रचनात्मकता और आत्मरक्षा से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया जा रहा है।