भगवान महावीर निर्वाण कल्याणक पर भीलवाड़ा में पहली बार बनेगी भव्य पावापुरी, 24 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ेगा
भीलवाड़ा में 9 नवम्बर को भगवान महावीर निर्वाण कल्याणक पर पहली बार भव्य पावापुरी की रचना होगी। आचार्य पुलकसागर महाराज के सानिध्य में 24 किलो का निर्वाण लाडू चढ़ेगा। जानिए महोत्सव और मंत्र जाप अनुष्ठान की पूरी तैयारी।
भीलवाड़ा में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मंच पर विराजमान आचार्य पुलकसागरजी महाराज श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए।
भीलवाड़ा में भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक महोत्सव पर इस बार पहली बार भव्य पावापुरी की रचना की जाएगी। राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ससंघ के ऐतिहासिक चातुर्मास के निष्ठापन (समापन) से पूर्व आयोजित होने वाले इस महोत्सव में आचार्यश्री के सानिध्य में 24 किलो का मुख्य निर्वाण लाडू चढ़ाया जाएगा। इसके साथ ही 24 पुण्यार्जक परिवार पांच-पांच किलो के 24 निर्वाण लाडू अर्पित करेंगे।
भीलवाड़ा, 2 नवम्बर। भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर 9 नवम्बर को शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में सुबह 8 से 10 बजे तक विशेष कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके लिए मध्यप्रदेश के कलाकार पिछले तीन-चार दिनों से भव्य पावापुरी की रचना तैयार करने में जुटे हैं। इस रचना का प्रदर्शन निर्वाण कल्याणक दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया जाएगा।
श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि निर्वाण कल्याणक महोत्सव की व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। कार्यक्रम में सुबह 8 बजे भगवान महावीर का पूजन होगा। इसके बाद निर्वाण कांड पाठ के साथ निर्वाण लाडू चढ़ाए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि आचार्यश्री के सानिध्य में धनतेरस से अमावस्या तक 6 से 8 नवम्बर के बीच मध्यरात्रि में मंत्र जाप अनुष्ठान आयोजित होगा। इसमें चातुर्मास कलश के पुण्यार्जक परिवार भी शामिल होंगे। इस दौरान सभी श्रावक लाल रंग की धोती-दुपट्टा धारण कर मंगल कलश के समक्ष बैठकर मंत्र जाप की आराधना करेंगे।
मंत्र अनुष्ठान के पश्चात मंगल कलश उन्हें प्रदान किए जाएंगे, जिन पुण्यार्जक परिवारों ने उनकी स्थापना करवाई है। आचार्य पुलकसागर महाराज के आशीर्वाद के साथ मिलने वाले इन मंगल कलशों को संबंधित परिवार अपने घरों में स्थापित कर सकेंगे।
मनोज्ञाचार्य पुलकसागरजी महाराज ससंघ के पावन सानिध्य में भीलवाड़ा चातुर्मास का निष्ठापन 15 नवम्बर को पिच्छी परिवर्तन के साथ होगा। इसके साथ ही आचार्यश्री भीलवाड़ा का ऐतिहासिक चातुर्मास सम्पन्न कर जहाजपुर की दिशा में मंगल विहार करेंगे। उनका जहाजपुर होते हुए श्रीमहावीरजी और आगरा की तरफ विहार करने का भाव है।