भीलवाड़ा के समेलिया फाटक क्षेत्र में गंभीर घायल अवस्था में मिलने के बाद अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाला युवक दिनेश सिंह रावत।

भीलवाड़ा में शराब की लत के कारण परिवार से दूर हुए 29 वर्षीय दिनेश सिंह रावत की दर्दनाक कहानी सामने आई है। पत्नी के छोड़कर जाने के बाद पिता ने उसे संभालने की उम्मीद में ट्रक पर खलासी का काम दिलवाया था, लेकिन यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर बन गया। सड़क किनारे गंभीर घायल अवस्था में मिले दिनेश की उपचार के दौरान मौत हो गई। पहचान नहीं होने पर पुलिस ने उसका अंतिम संस्कार भी करवा दिया। आठ दिन बाद सोशल मीडिया पर तस्वीर देखकर परिजनों को उसकी पहचान हुई, लेकिन तब तक बेटे की अंतिम विदाई भी हो चुकी थी।

मृतक दिनेश सिंह रावत (29) करेड़ा थाना क्षेत्र के बड़ी का बाड़िया का निवासी था। 14 अक्टूबर की रात वह समेलिया फाटक क्षेत्र में गंभीर घायल अवस्था में मिला था। उपचार के दौरान 19 अक्टूबर को अजमेर में उसकी मौत हो गई। पहचान नहीं होने के कारण 23 अक्टूबर को अजमेर के नागफणी श्मशान घाट पर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया। आठ दिन बाद परिजनों ने सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीर, कपड़ों और हाथ पर गुदे नाम के आधार पर उसकी पहचान की।

पुलिस के अनुसार, 14 अक्टूबर की रात करीब साढ़े 11 बजे पुर थाने को सूचना मिली कि समेलिया फाटक क्षेत्र में शराब के ठेके और पेट्रोल पंप के बीच सड़क किनारे एक युवक गंभीर घायल अवस्था में पड़ा है। सहायक उप निरीक्षक यशवीर के मुताबिक, पुलिस मौके पर पहुंची तो पता चला कि राहगीर युवक को पहले ही जिला अस्पताल पहुंचा चुके हैं।

जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद युवक की गंभीर हालत को देखते हुए उसे अजमेर रेफर कर दिया गया। वहां उपचार के दौरान 19 अक्टूबर को उसने दम तोड़ दिया। मृतक के पास पहचान से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं था, जिसके चलते उसकी शिनाख्त नहीं हो सकी। पुलिस ने पहचान के लिए प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिलने पर 23 अक्टूबर को पोस्टमार्टम के बाद अजमेर के नागफणी श्मशान घाट पर शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।

परिजनों के अनुसार, दिनेश सिंह शराब पीने का आदी था। उसकी इस लत के कारण पत्नी भी उसे छोड़कर चली गई थी। बेटे की स्थिति सुधारने की उम्मीद में परिवार ने उसे गांव के ही एक चालक के साथ ट्रक पर खलासी का काम दिलवा दिया था। परिजनों को उम्मीद थी कि काम में व्यस्त रहने से वह शराब की लत से दूर हो सकेगा और उसकी जिंदगी दोबारा पटरी पर लौट आएगी।

बताया गया कि 14 अक्टूबर को दिनेश सिंह गंगरार टोल क्षेत्र में ट्रक से उतर गया था। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। चालक ने काफी देर तक उसका इंतजार किया, लेकिन जब दिनेश नहीं आया तो वह ट्रक लेकर रवाना हो गया। दूसरी ओर, परिवार ने भी उस समय दिनेश के लापता होने को लेकर ज्यादा ध्यान नहीं दिया।

29 अक्टूबर को परिजन दिनेश सिंह के लापता होने की रिपोर्ट दर्ज कराने गंगरार थाने पहुंचे। इसी दौरान सोशल मीडिया पर एक अज्ञात मृतक की तस्वीर देखकर उन्हें संदेह हुआ। इसके बाद परिजन पुर थाने पहुंचे और वहां उपलब्ध जानकारी के आधार पर मृतक की पहचान करने की कोशिश की। कपड़ों, तस्वीर और हाथ पर गुदे नाम के आधार पर पुष्टि हुई कि मृतक उनका बेटा दिनेश सिंह रावत ही था।

शुक्रवार रात बड़ी का बाड़िया निवासी घीसासिंह रावत ने पुलिस को बताया कि मृतक उनका बेटा दिनेश सिंह था। इस तरह आठ दिन बाद परिवार को बेटे की पहचान तो मिल गई, लेकिन तब तक उसका अंतिम संस्कार हो चुका था।

जिस बेटे की तलाश में परिजन भटक रहे थे, उसकी मौत की खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। अब उनके पास बेटे को आखिरी बार देखने या उसका अंतिम संस्कार करने का अवसर भी नहीं बचा था। शराब की लत के कारण परिवार से दूर हुए दिनेश की मौत और पहचान में हुई देरी ने परिजनों की पीड़ा और बढ़ा दी।

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