तस्वीर में भुसावर के एक मंदिर परिसर में शिव भक्त और कांवड़िए अनुष्ठान के दौरान भगवान शिव का जलाभिषेक करते हुए नजर आ रहे हैं।

भुसावर में सावन माह के आखिरी सोमवार, 24 अगस्त को प्रीति योग, हंस राजयोग, आयुष्मान योग और बुधादित्य राजयोग जैसे शुभ संयोग के बीच बारिश की फुहारों ने मौसम को भक्तिमय बना दिया। भुसावर सहित उपखण्ड मुख्यालय क्षेत्र के ग्रामीण अंचल में स्थित शिव मंदिरों में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। शिवालय हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंजते रहे। कांवड़ियों सहित शिव भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर पूजा-अर्चना की।

भुसावर कस्बे के सैरकी सड़क मार्ग स्थित खिरकारी चौराहा के पास भगतराज वाले हनुमान जी मंदिर और बरपाड़ा कॉलोनी स्थित ब्राह्मण धर्मशाला में अथाई वाले हनुमान जी शिव मंदिर में सावन की पावन बेला पर धर्म, आस्था और शिव भक्ति का संगम देखने को मिला। भगतराज भक्त मंडल एवं समस्त भुसावर कस्बे के तत्वावधान में निशुल्क डांक कांवड़ यात्रा आयोजित की गई।

कछला घाट सोरौंजी से 21 शिवभक्त पैदल गंगाजल लेकर डांक कांवड़ के साथ भुसावर पहुंचे। शिव भक्तों ने भगतराज वाले हनुमान जी मंदिर और बरपाड़ा कॉलोनी स्थित अथाई वाले हनुमान जी शिव मंदिर में पंडित पुष्पेंद्र शर्मा के मंत्रोच्चारण के साथ विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की। इसके बाद गंगाजल, दुग्ध, घी और दही आदि से रुद्राभिषेक किया गया।

सावन माह के आखिरी सोमवार पर पंचांग के अनुसार प्रीति योग, हंस राजयोग, आयुष्मान योग और बुधादित्य राजयोग जैसे शुभ संयोग रहे। इस अवसर पर हूंकारेश्वर महादेव मंदिर, हिण्डौन सड़क मार्ग स्थित कोठी वाले हनुमान जी मंदिर, बड़वाले शिम्भू मंदिर, भगतराज वाले हनुमान जी मंदिर, रात वाले हनुमान जी मंदिर, पुरानी अनाज मंडी स्थित लक्ष्मण जी मंदिर और बरपाड़ा स्थित अथाई वाले हनुमान जी मंदिर सहित विभिन्न मंदिरों और शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

शिव भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्ध अभिषेक और पंचामृत से अभिषेक किया। इसके साथ ही बेलपत्र, धतूरा के फूल, पुष्प और दूब अर्पित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि की मनोकामना मांगी। मंदिर परिसरों में श्रद्धालुओं के जयकारों से पूरे वातावरण में शिव भक्ति का उल्लास नजर आया। सावन के अंतिम सोमवार पर भुसावर क्षेत्र के शिवालयों में कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने धार्मिक आयोजन को विशेष स्वरूप दिया।

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