भुसावर में ‘मुस्कान एक पहल’ बनी जरूरतमंदों का सहारा, दीपावली पर घर-घर पहुंचाई खुशियां
भुसावर में ‘मुस्कान एक पहल’ संस्था ने दीपावली पर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मदद के लिए विशेष सेवा अभियान चलाया। जरूरतमंद बच्चों, अकेले जीवन जी रहे महिला-पुरुषों और परिवारों को मिठाई, कपड़े, पूजन सामग्री सहित दैनिक उपयोग की वस्तुएं वितरित की गईं।
भुसावर में 'मुस्कान एक पहल' संस्था द्वारा जरूरतमंद परिवारों को दीपावली सामग्री वितरित करते हुए संस्थापक अरविन्द मित्तल व अन्य.
भुसावर में आर्थिक तंगी और विपरीत परिस्थितियों से जूझ रहे जरूरतमंद परिवारों के लिए दीपावली की खुशियां लेकर ‘मुस्कान एक पहल’ संस्था आगे आई। जनसहयोग से संचालित संस्था ने दीपावली के अवसर पर जरूरतमंद परिवारों को आवश्यक सामग्री वितरित कर उन्हें त्योहार मनाने में सहयोग दिया।
संस्था की ओर से प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी ऐसे परिवारों का चयन किया गया, जो आर्थिक परेशानियों के चलते त्योहार मनाने की स्थिति में नहीं हैं। इन परिवारों को दो वक्त के भोजन का इंतजाम करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
संस्था के संस्थापक अरविन्द मित्तल ने बताया कि संस्था की ओर से प्रत्येक वर्ष तीज-त्योहारों पर जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए विशेष सेवा प्रकल्प संचालित किए जाते हैं। इनमें ऐसे बच्चे शामिल हैं, जिनके माता-पिता नहीं हैं। इसके अलावा परिस्थितिवश एकाकी जीवन जीने को मजबूर महिला-पुरुषों की सहायता कर उन्हें सहारा देने का प्रयास किया जाता है।
दीपावली के अवसर पर वितरित की गई सहायता किट में मिठाई, पेठा, साड़ी, पेंट-शर्ट, लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं और पूजन सामग्री शामिल की गई। इसके साथ ही मोमबत्ती, खील-बताशे, अगरबत्ती, माचिस, चीनी, चायपत्ती, नहाने एवं कपड़े धोने के साबुन तथा सर्फ सहित दैनिक उपयोग की आवश्यक सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।
इस सेवा कार्य को सफल बनाने में बलदेव सिंह अग्रवाल, विजय गुप्ता, सुभाष गोयल, डॉ. ओमप्रकाश, सुभाष कम्पाउंडर, मुस्कान रावतभाटा, कल्याण शर्मा, पूरन नेवारिया एवं मुन्नालाल का विशेष सहयोग रहा।
‘मुस्कान एक पहल’ संस्था के इस प्रयास से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को दीपावली पर मिठाई, कपड़े, पूजन सामग्री और दैनिक जरूरत का सामान मिला। संस्था ने जनसहयोग के माध्यम से ऐसे परिवारों को त्योहार की खुशियों में शामिल होने का अवसर प्रदान किया, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण दीपावली मनाने में भी असमर्थ थे।