बारां: सेवानिवृत्त शिक्षिका सुदर्शना दुबे ने शिक्षक दिवस पर किया देहदान का संकल्प
मेडिकल छात्रों के शोध के लिए शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से देहदान का निर्णय लिया, जिससे भावी डॉक्टरों के अध्ययन में मदद मिल सके।
तस्वीर में रंगीन दुपट्टा पहने बारां की सेवानिवृत्त शिक्षिका सुदर्शना दुबे दिख रही हैं।
बारां। शिक्षक जीवनभर विद्यार्थियों को ज्ञान देकर उनके भविष्य को संवारता है, लेकिन बारां की एक सेवानिवृत्त शिक्षिका ने जीवन के बाद भी भावी पीढ़ी के निर्माण में योगदान देने का संकल्प लेकर मिसाल पेश की है। शहर के राजपुरा वार्ड निवासी जाने-माने अधिवक्ता रहे स्वर्गीय कैलाश नारायण शर्मा की पुत्री एवं सेवानिवृत्त शारीरिक शिक्षिका सुदर्शना दुबे ने 5 सितंबर, शिक्षक दिवस के अवसर पर मरणोपरांत चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए अपनी देहदान करने का प्रण लिया।
शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से आयोजित देहदान संकल्प कार्यक्रम में सुदर्शना दुबे ने विधिवत देहदान घोषणा-पत्र पर हस्ताक्षर कर संस्थान को सौंपा। उनके इस निर्णय पर परिवार ने भी पूर्ण सहमति जताई। घोषणा-पत्र में उनकी माता विमला शर्मा एवं भाभी मधु शर्मा साक्षी के रूप में उपस्थित रहीं।
पूर्व शारीरिक शिक्षिका एवं राष्ट्रीय स्तर की हॉकी खिलाड़ी रहीं सुदर्शना दुबे ने इस अवसर पर कहा, "एक शिक्षक के रूप में मैंने जीवन भर बच्चों के भविष्य निर्माण का कार्य किया है। मेरी दिली इच्छा थी कि सेवानिवृत्ति और जीवनोपरांत भी यह नश्वर देह भावी पीढ़ी के ही काम आए। बारां में मेडिकल कॉलेज की शुरुआत हो चुकी है, जहाँ अध्ययनरत मेडिकल छात्रों को शोध व प्रायोगिक अध्ययन के लिए देह की अत्यंत आवश्यकता होती है। यदि मेरे शरीर के अध्ययन से कोई विद्यार्थी एक कुशल डॉक्टर बनकर आगे चलकर सैकड़ों जिंदगियां बचाता है, तो मेरा शिक्षिका और मानव दोनों रूप में जीवन सार्थक हो जाएगा।"
इस प्रेरणादायी अवसर पर भारत विकास परिषद के अध्यक्ष नरेश खंडेलवाल, सचिव हितेश खंडेलवाल एवं कोषाध्यक्ष अंबिका प्रकाश शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। परिषद पदाधिकारियों ने सुदर्शना दुबे के इस त्यागपूर्ण निर्णय की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए उनका आभार जताया।
भारत विकास परिषद के पदाधिकारियों ने कहा कि सुदर्शना दुबे का यह संकल्प समाज में अंगदान व देहदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने और जन-जागरण का सशक्त माध्यम बनेगा। शिक्षक दिवस पर लिया गया यह देहदान संकल्प सेवानिवृत्ति के बाद भी भावी पीढ़ी के भविष्य निर्माण में योगदान देने की उनकी प्रतिबद्धता को सामने लाता है।