तस्वीर में बारां जिला चिकित्सालय के बर्खास्त प्लेसमेंट कर्मचारी न्याय की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपते हुए नजर आ रहे हैं।

बारां। शहीद राजमल मीना राजकीय चिकित्सालय, बारां में कार्यरत प्लेसमेंट कर्मचारियों को बिना किसी पूर्व नोटिस के सेवा से हटाए जाने और ठेकेदार द्वारा अवैध वसूली किए जाने के आरोपों ने मामला गरमा दिया है। पीड़ित कर्मचारियों ने जिला कलेक्टर और बारां विधायक राधेश्याम बैरवा को ज्ञापन सौंपकर न्याय और पुनः नियुक्ति की मांग की है।

ज्ञापन में कर्मचारियों ने बताया कि 22.08.2026 को स्वास्थ्य विभाग की बैठक में आईपीडी के विरुद्ध कम टीआईडी जनरेट होने का हवाला दिया गया। इसके बाद कंप्यूटर ऑपरेटर दिलीप बैरवा, हेमन्त पोटर, लोकेश बैरवा, पवन मीना, तेजेन्द्र सिंह राठौर, हेमन्त मीणा और पिंकी मीना की सेवाएं 24.08.2026 को बिना किसी पूर्व नोटिस के समाप्त कर दी गईं।

कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी जगह सरकार द्वारा चयनित चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों से मां योजना काउंटर पर कंप्यूटर ऑपरेटर का कार्य कराया जा रहा है, जबकि उनका मूल कार्य वार्ड मेंटेन करना और साफ-सफाई का ध्यान रखना है।

पीड़ित कर्मचारियों के अनुसार वे मात्र 8144 रुपये के अल्प वेतन पर निरंतर सेवाएं दे रहे थे। उनका कहना है कि इतनी कम राशि में परिवार का गुजारा चलाना भी मुश्किल हो रहा है। कर्मचारियों ने वर्तमान ठेकेदार मैसर्स यादव ट्रेडर्स पर सीधे खाते में वेतन नहीं देने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार 1000 रुपये प्रतिमाह सर्विस चार्ज और जीएसटी के नाम पर काटकर 8144 रुपये का चेक दिया जा रहा है। कर्मचारियों ने इसे वर्तमान ठेकेदार द्वारा की जा रही अवैध वसूली बताया है।

ज्ञापन में पूर्व फर्म देव एण्ड कम्पनी से संबंधित बकाया भुगतान का मामला भी उठाया गया है। कर्मचारियों ने बताया कि मई 2024 से अक्टूबर 2024 तक 6 माह का पीएफ और 1 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक का वेतन आज तक नहीं दिया गया है। इससे प्रति कार्मिक लगभग 14000 रुपये का नुकसान हुआ है।

पीड़ित कर्मचारियों ने बताया कि इस संबंध में पीएमओ डॉ. नरेन्द्र कुमार मेघवाल और पूर्व जिला कलेक्टर को कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला। कर्मचारियों ने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने के साथ उन्हें पुनः पद पर नियुक्त करने की मांग की है।

अब मामला जिला कलेक्टर और बारां विधायक को सौंपे गए ज्ञापन के बाद प्रशासनिक स्तर पर जांच और कार्रवाई की मांग तक पहुंच गया है। कर्मचारियों ने सेवा समाप्ति, वेतन, पीएफ और ठेकेदार पर लगाए गए अवैध वसूली के आरोपों की जांच कर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है।

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