हापुड़ के सरस्वती कॉलेज में आयोजित ट्रेनिंग प्रोग्राम में भाग लेते छात्र और विशेषज्ञ।

हापुड़ (उत्तर प्रदेश)। अनवरपुर स्थित सरस्वती कॉलेज ऑफ फार्मेसी में विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए दो दिवसीय हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया गया। बी.वी. पटेल एजुकेशन फाउंडेशन, अहमदाबाद के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘द एनालिटिकल वर्कबेंच : टेक्निक्स, टूल्स एंड ट्रबलशूटिंग’ रहा। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों के संचालन से लेकर तकनीकी खामियों की पहचान और उनके समाधान तक का व्यावहारिक अनुभव मिला।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि बी.वी. पटेल एजुकेशन फाउंडेशन की उप निदेशक डॉ. नीता श्रीवास्तव और विशिष्ट अतिथि सरस्वती इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के महाप्रबंधक एन. वरदराजन ने दीप प्रज्वलित कर किया।

इस अवसर पर कॉलेज के प्रधानाचार्य प्रो. (डॉ.) नितिन कुमार ने फार्मेसी शिक्षा में व्यावहारिक प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा, "फार्मेसी के क्षेत्र में केवल सैद्धांतिक (थ्योरी) ज्ञान ही पर्याप्त नहीं है। विद्यार्थियों को आधुनिक उपकरणों के संचालन और प्रयोगशाला में आने वाली तकनीकी चुनौतियों से निपटने का व्यावहारिक अनुभव होना भी बेहद जरूरी है।"


दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को एचपीएलसी (HPLC) सहित विभिन्न आधुनिक विश्लेषणात्मक तकनीकों और उपकरणों की कार्यप्रणाली की विस्तृत जानकारी दी गई। इसके साथ ही नमूना परीक्षण (सैंपल टेस्टिंग), मेथड डेवलपमेंट, गुणवत्ता नियंत्रण (क्वालिटी कंट्रोल) और गुणवत्ता आश्वासन (क्वालिटी एश्योरेंस) से जुड़ी प्रक्रियाओं का भी प्रशिक्षण दिया गया।

क्षेत्र के विशेषज्ञ निशांत गौड़, मनोज शर्मा और निशांत मिश्रा ने प्रतिभागियों को आधुनिक उपकरणों के संचालन की बारीकियां समझाईं। उन्होंने प्रयोगशाला में आने वाली तकनीकी त्रुटियों की पहचान करने और उनका समाधान करने के व्यावहारिक तरीके भी बताए। प्रशिक्षण के हैंड्स-ऑन सत्रों में विद्यार्थियों और शोधार्थियों को स्वयं आधुनिक उपकरणों पर अभ्यास करने का अवसर मिला।

कार्यक्रम का संयोजन डॉ. नितिन कुमार और सह-संयोजन प्रो. (डॉ.) सुप्रिया मैती ने किया, जबकि मंच संचालन डॉ. अरुण कुमार ने किया। समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

आयोजकों के अनुसार, प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को फार्मास्युटिकल उद्योग (फार्मा इंडस्ट्री) और अनुसंधान (रिसर्च) के लिए जरूरी व्यावहारिक एवं तकनीकी कौशल से सुदृढ़ और दक्ष बनाना था। आधुनिक प्रयोगशाला उपकरणों पर प्रत्यक्ष अभ्यास के माध्यम से प्रतिभागियों को तकनीकी कार्यप्रणाली और प्रयोगशाला संबंधी चुनौतियों से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया।

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