तस्वीर में मेरठ विकास प्राधिकरण के पूर्व सचिव अर्पित गुप्ता अपनी टेबल पर बैठे हुए नजर आ रहे हैं।

मेरठ विकास प्राधिकरण (एमडीए) में अवैध निर्माण से जुड़े संवेदनशील मामले में शासन स्तर पर बड़ी कार्रवाई हुई है। सुप्रीम कोर्ट में जारी सुनवाई के दौरान प्राधिकरण की ओर से लचर पैरवी और त्रुटिपूर्ण सर्वे रिपोर्ट पेश किए जाने के आरोपों के बीच एमडीए सचिव अर्पित गुप्ता को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है। शासन ने उन्हें लखनऊ मुख्यालय से संबद्ध कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मेरठ शहर में फैले करीब 16,700 अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मामला विचाराधीन है। कोर्ट ने इस मामले में मेरठ विकास प्राधिकरण से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। इसी क्रम में एमडीए सचिव अर्पित गुप्ता ने जोन-4 से संबंधित सर्वे और निरीक्षण रिपोर्ट तैयार कराकर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की थी।

सुनवाई के दौरान रिपोर्ट के परीक्षण में प्राधिकरण की ओर से की गई पैरवी और पेश किए गए आंकड़ों में खामियां और लापरवाही सामने आई। सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शासन ने इसे गंभीरता से लिया।

सुप्रीम कोर्ट जैसे शीर्ष मंच पर प्राधिकरण और शासन की किरकिरी के बाद शासन स्तर पर उच्च अधिकारियों ने नाराजगी व्यक्त की। प्रथम दृष्टया जिम्मेदारी तय करते हुए एमडीए सचिव अर्पित गुप्ता की कार्यशैली को लापरवाही माना गया। इसके बाद उन्हें पद से हटाकर लखनऊ संबद्ध करने का आदेश जारी कर दिया गया।

फिलहाल अर्पित गुप्ता के स्थान पर मेरठ विकास प्राधिकरण के नए सचिव की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी, इस संबंध में शासन स्तर से अलग आदेश जारी किया जाएगा।

एमडीए सचिव के खिलाफ हुई इस सीधी कार्रवाई के बाद विकास प्राधिकरण कार्यालय में दिनभर अफरा-तफरी का माहौल रहा। अवैध निर्माणों पर कार्रवाई न करने और कोर्ट में सही तथ्य पेश न करने वाले अन्य मातहत अधिकारियों और इंजीनियरों में भी कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ गई है।

सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब आने वाले दिनों में मेरठ में अवैध निर्माणों के खिलाफ ध्वस्तीकरण की बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है। मामले में शासन की कार्रवाई से एमडीए की कार्यप्रणाली और सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश की गई रिपोर्ट को लेकर प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता स्पष्ट हुई है।

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