तस्वीर में बसपा राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती लखनऊ में पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर रही हैं।

लखनऊ में 23 सितंबर को बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने आगामी विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों को गति देने के लिए पार्टी के राष्ट्रीय पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं की आपात और उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में मायावती के साथ उनके भाई और बसपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार तथा छोटे भतीजे ईशान आनंद की मंच पर मौजूदगी ने पार्टी के भावी नेतृत्व और संगठनात्मक फेरबदल को लेकर चर्चाओं को तेज कर दिया।

यह बैठक बसपा में हालिया सांगठनिक बदलावों के बीच हुई। इससे पहले मायावती के बड़े भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाकर पार्टी से निष्कासित किया गया था, लेकिन बाद में उनकी संगठन में वापसी हुई। इसके बाद बसपा प्रमुख ने संगठन में संतुलन और भरोसा कायम करने के लिए अपने छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर के तौर पर आगे बढ़ाया है।

मायावती ने हाल ही में स्पष्ट किया था कि उनके भाई आनंद कुमार के बच्चों में से केवल ईशान आनंद को ही पार्टी संगठन का कामकाज संभालने की जिम्मेदारी दी जाएगी। अब 23 सितंबर की महत्वपूर्ण बैठक में ईशान आनंद की मंच पर प्रमुख मौजूदगी को बसपा की नई पीढ़ी के उभार और भविष्य के सांगठनिक ढांचे से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, पार्टी की ओर से अभी आधिकारिक तौर पर उत्तराधिकारी के नाम पर कोई अंतिम दावा नहीं किया गया है।

सूत्रों के अनुसार, ईशान आनंद को संगठन के भीतर कामकाज की बारीकी से समीक्षा करने और कार्यकर्ताओं का फीडबैक जुटाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह सीधे जमीनी स्तर पर संगठन के पुनर्गठन की निगरानी करेंगे और अपनी रिपोर्ट सीधे बसपा प्रमुख मायावती तथा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार को सौंपेंगे।

लखनऊ स्थित बसपा मुख्यालय में हुई इस बैठक का एजेंडा केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड और पंजाब में भी संगठन की तैयारियों का विस्तृत खाका तैयार किया जा रहा है। मायावती ने विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों और वरिष्ठ प्रभारियों के साथ बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया।

बैठक में देश के मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक हालातों पर भी गहन चर्चा की गई। पार्टी के जनाधार को वापस पाने, दलित-पिछड़े समीकरण को साधने और बसपा के कैडर कार्यक्रमों में नई ऊर्जा भरने के लिए नेताओं को कड़े दिशा-निर्देश दिए गए। ऐसे में 23 सितंबर की लखनऊ बैठक को उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड में 'मिशन-2027' की संगठनात्मक तैयारियों के साथ-साथ बसपा के भीतर उभरते नए सांगठनिक ढांचे के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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