हापुड़ में देशी अंडा उत्पादन को बढ़ावा: 50 लोगों को बरेली में मुफ्त प्रशिक्षण, मिलेंगे उन्नत नस्ल के चूजे
हापुड़ में देशी अंडा उत्पादन बढ़ाने के लिए जिला प्रशासन ने 50 प्रशिक्षणार्थियों को बरेली के राष्ट्रीय पक्षी अनुसंधान केंद्र भेजा है। दो दिवसीय निःशुल्क प्रशिक्षण के बाद उन्नत नस्ल के चूजे और पोल्ट्री फार्म स्थापित करने में विभागीय सहायता मिलेगी।
हापुड़ में मुर्गियों के प्रशिक्षणार्थियों की बस को हरी झंडी दिखाकर किया रवाना।
उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में देशी अंडा उत्पादन को बढ़ावा देने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर विकसित करने के लिए जिला प्रशासन ने पहल की है। जिलाधिकारी महोदया की प्रेरणा और निर्देशन में 50 इच्छुक प्रशिक्षणार्थियों को दो दिवसीय एक्सपोजर विजिट एवं प्रशिक्षण के लिए आईवीआरआई (IVRI), बरेली स्थित राष्ट्रीय पक्षी अनुसंधान केंद्र (CARI) रवाना किया गया। इस प्रशिक्षण के माध्यम से लाभार्थियों को देशी मुर्गी पालन की तकनीक सिखाई जाएगी। प्रशिक्षण पूरी तरह निःशुल्क होगा और इसे पूरा करने के बाद लाभार्थियों को स्वदेशी उन्नत नस्ल की लेयर मुर्गियों के चूजे भी उपलब्ध कराए जाएंगे।
प्रशिक्षणार्थियों की बस को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ओ.पी. मिश्रा, जिला पंचायत राज अधिकारी और संयुक्त निदेशक (सदर) ने संयुक्त रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल का उद्देश्य जिले में देशी अंडों के उत्पादन को बढ़ाना और इच्छुक लोगों को मुर्गी पालन के माध्यम से स्वरोजगार से जोड़ना है।
दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम राष्ट्रीय पक्षी अनुसंधान केंद्र, इज्जत नगर, बरेली में आयोजित किया जाएगा। यहां प्रशिक्षणार्थियों को देशी मुर्गी पालन से जुड़ी बारीकियों की जानकारी दी जाएगी। कार्यक्रम की प्रमुख विशेषता यह है कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद सभी लाभार्थियों को स्वदेशी उन्नत नस्ल की लेयर मुर्गियों के चूजे उपलब्ध कराए जाएंगे। ये चूजे राष्ट्रीय पक्षी अनुसंधान केंद्र के माध्यम से ही दिए जाएंगे।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. ओ.पी. मिश्रा ने बताया कि प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य हापुड़ जिले में देशी अंडे के उत्पादन को तेजी से बढ़ाना है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद सभी लाभार्थियों को उनकी क्षमता के अनुसार 500 से 2000 मुर्गियों की क्षमता वाले पोल्ट्री फार्म स्थापित करने में विभागीय सहायता दी जाएगी। इन फार्मों को पूरी तरह केज-लेस यानी पिंजरामुक्त रखा जाएगा। देशी अंडा उत्पादन के लिए इन्हें डीप लिटर सिस्टम के तहत छोटे-छोटे फार्मों के रूप में विकसित किया जाएगा।
इस अभियान को सफल बनाने में ईको एग्स कोऑपरेटिव लिमिटेड, बागपत की सुश्री रुबीना नितिन अय्यर भी विशेष सहयोग प्रदान कर रही हैं। वहीं, प्रशिक्षणार्थियों की सुविधा और मार्गदर्शन के लिए पशुपालन विभाग के अधिकारी डॉ. मदन पाल सिंह एवं डॉ. आनंद गिल को कार्यक्रम में समन्वयक (कोऑर्डिनेटर) के रूप में साथ भेजा गया है।
जिला प्रशासन की इस पहल से हापुड़ में देशी अंडा उत्पादन को बढ़ावा मिलने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित होने की उम्मीद है। निःशुल्क प्रशिक्षण, उन्नत नस्ल के चूजों की उपलब्धता और 500 से 2000 मुर्गियों की क्षमता वाले पिंजरामुक्त पोल्ट्री फार्म स्थापित करने में विभागीय सहायता के जरिए जिले में छोटे स्तर पर देशी मुर्गी पालन को प्रोत्साहित करने की योजना है। इस पहल से आने वाले समय में हापुड़ के देशी अंडा उत्पादन के क्षेत्र में नए हब के रूप में उभरने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।