तस्वीर में पुलिस हथकड़ी पहने व्यक्ति को पकड़े हुए है और पास में कानूनी पुस्तक रखी है।

चंदौली। अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत बुधवार को जिले में पांच मामलों में दोषसिद्ध अभियुक्तों को सजा सुनाई गई। इनमें बलुआ थाने में वर्ष 2009 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के चार मामलों में कुल 15 वर्ष के कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा हुई। वहीं, अलीनगर थाने में वर्ष 2015 में दर्ज एनडीपीएस एक्ट के मामले में अभियुक्त को 20 दिन के साधारण कारावास और 13 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया।

बलुआ थाने में वर्ष 2009 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मामलों में महुअर कला निवासी केशरी सिंह को एडीजे/एफटीसी द्वितीय न्यायालय ने छह वर्ष के कारावास और 10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर उसे 10 दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

इसी मामले में संतोष सिंह, अजीत सिंह, धर्मराज सिंह और सुनील सिंह को तीन-तीन वर्ष के कारावास और 10-10 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया। अर्थदंड न देने पर प्रत्येक को सात दिन का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इन चार मामलों में सुनाई गई सजाओं के तहत कुल 15 वर्ष का कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड निर्धारित हुआ।

अलीनगर थाने में वर्ष 2015 में दर्ज धारा 8/20 एनडीपीएस एक्ट के मामले में रोहड़ा निवासी मनोज बिन्द को दोषसिद्ध करते हुए एएसजे/एफटीसी प्रथम न्यायालय ने 20 दिन के साधारण कारावास और 13 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर उसे तीन माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

पुलिस के अनुसार, इन सभी मामलों में मॉनिटरिंग सेल, अभियोजन अधिकारी अवधेश कुमार पाण्डेय (एडीजीसी) और संबंधित थानों के पैरोकारों की प्रभावी पैरवी रही। पुलिस ने वैज्ञानिक विवेचना और साक्ष्य संकलन को भी अभियुक्तों की दोषसिद्धि में महत्वपूर्ण बताया है। ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई इन सजा से संबंधित मामलों में न्यायालयीन पैरवी और साक्ष्य संकलन की भूमिका सामने आई है।

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