तस्वीर में मंच पर पारंपरिक वेशभूषा में शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुत करते कलाकार नजर आ रहे हैं।

नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन कूटनीतिक बैठकों के साथ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत भी वैश्विक मंच पर प्रमुखता से उभरी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आयोजित भव्य रात्रिभोज में करीब 160 भारतीय और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों ने प्रस्तुतियां देकर ब्रिक्स देशों के सामने भारत की सांस्कृतिक विविधता और विरासत की झलक पेश की।

‘ब्रिक्स सिम्फनी- वन रिदम, मेनी कल्चर्स’ की थीम पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम का उद्देश्य ब्रिक्स देशों की विविध संगीत और नृत्य परंपराओं को एक साझा मंच पर लाना था। इस दौरान भारतीय कलाकारों ने भरतनाट्यम, कुचिपुड़ी, ओडिसी और कथक जैसी शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से देश की सांस्कृतिक विविधता को प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय नृत्य परंपराओं के साथ ब्रिक्स के अन्य सदस्य और साझेदार देशों के पारंपरिक वाद्ययंत्रों और धुनों को भी जोड़ा गया। इससे सांस्कृतिक जुड़ाव और सौहार्द का संदेश सामने आया। इस विशेष सांस्कृतिक संध्या की अगुवाई विदेश मंत्रालय से संबद्ध भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद ने की।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन सर्वसम्मति से पारित ‘नई दिल्ली घोषणापत्र’ में भी कला और संस्कृति को विशेष स्थान दिया गया। सदस्य देशों ने युद्धग्रस्त क्षेत्रों में सांस्कृतिक संपत्तियों की सुरक्षा, प्राचीन धरोहरों के अवैध व्यापार पर रोक लगाने और ऐसी धरोहरों को उनके मूल देश वापस सौंपने यानी रिफंड और रीपैट्रिएशन पर पूर्ण सहमति जताई।

घोषणापत्र में ईको-फ्रेंडली और स्मार्ट टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए एआई (AI) तथा डिजिटल पेमेंट सिस्टम के उपयोग पर भी बल दिया गया। इस तरह शिखर सम्मेलन के पहले दिन कूटनीतिक संवाद के साथ सांस्कृतिक विरासत, धरोहर संरक्षण और आधुनिक तकनीक के जरिए पर्यटन को बढ़ावा देने के मुद्दे भी प्रमुखता से सामने आए।

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