तस्वीर में काली शर्ट पहने एक व्यक्ति की पासपोर्ट आकार की फोटो दिखाई दे रही है।

उदयपुर जिले के उपखंड झाडोल के मंगवास गांव निवासी अध्यापक नरेश कुमार लोहार जनजाति क्षेत्र में शिक्षा और जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद के लिए पिछले 10 वर्षों से लगातार प्रयासरत हैं। राजकीय प्राथमिक विद्यालय घाटाफला में कार्यरत नरेश कुमार लोहार अध्यापक भामाशाह प्रेरक की भूमिका निभाते हुए सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों से भामाशाहों को प्रेरित कर जरूरतमंद विद्यालयों और विद्यार्थियों तक शैक्षिक व सहशैक्षिक सामग्री पहुंचा रहे हैं। उनके प्रयासों से अब तक 300 से ज्यादा विद्यालयों के हजारों विद्यार्थियों को सहायता मिल चुकी है।

अध्यापक नरेश कुमार लोहार द्वारा विद्यार्थियों तक उत्तर पुस्तिकाएं, पेन, पेंसिल, रबर, शार्पनर, रजिस्टर, स्कूल बैग, छाता, ट्रैकसूट, खिलौने, जूते, चप्पल, दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए व्हीलचेयर, ड्राइंग बुक्स, राइटिंग बुक्स, वॉटर बॉटल, स्वेटर और कपड़े सहित विभिन्न सामग्री पहुंचाई गई है। वहीं विभिन्न विद्यालयों में अंत्योदय फाउंडेशन मुंबई और दानदाताओं के सहयोग से प्रोजेक्टर, कंप्यूटर, साउंड सिस्टम, स्मार्ट टीवी, इलेक्ट्रिक स्वचालित घंटी, मध्यान भोजन के लिए बर्तन, दरिया, ग्रीन बोर्ड, पानी की टंकियां, फर्नीचर और वाटर डिस्पेंसर भी उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

अध्यापक द्वारा भामाशाहों को प्रेरित कर क्षेत्र के न्यून नामांकन वाले, अति पिछड़े, दुर्गम पहाड़ी, जरूरतमंद तथा आधारभूत सुविधाओं से वंचित विद्यालयों में निर्माण कार्य और मरम्मत सहित अन्य कार्य भी करवाए जा रहे हैं। उनका प्रयास केवल विद्यालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि गरीब और जरूरतमंद प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं को उच्च अध्ययन के अवसर उपलब्ध कराने तक भी पहुंच रहा है।

ऐसे गरीब और जरूरतमंद छात्र-छात्र जो पढ़ने में प्रतिभाशाली हैं, लेकिन उच्च अध्ययन के लिए सक्षम नहीं हैं, उनके लिए अध्यापक विभिन्न संस्थाओं और भामाशाहों से संपर्क कर उच्च अध्ययन तथा नीट, जीइईई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए निशुल्क कोचिंग और हॉस्टल सुविधा उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष के हिसाब से छात्रवृत्ति दिलाने का प्रयास भी किया जा रहा है।

छात्र हित, मानव हित और पर्यावरण हित में अध्यापक द्वारा विभिन्न अभियान भी चलाए जा रहे हैं। ‘हर हाथ कलम अभियान’ के तहत स्टेशनरी बैंक के माध्यम से जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को स्टेशनरी, स्कूल बैग, नोटबुक, वॉटर बॉटल, लंच बॉक्स और कपड़े वितरित किए जाते हैं। ‘मिशन चरणकमल’ के तहत जूता बैंक के माध्यम से नंगे पैरों विद्यालय जाने को मजबूर छात्र-छात्राओं को स्कूल शूज और चप्पल उपलब्ध कराई जाती हैं। ‘अभियान गुलाबी सर्दी’ के तहत ठंड से ठिठुरते स्कूली बच्चों को भामाशाहों के माध्यम से स्वेटर तथा गरीब जरूरतमंद लोगों और बच्चों को ऊनी कपड़े और कंबल वितरित किए जाते हैं।

‘वस्त्रम’ अभियान के तहत वस्त्र बैंक के माध्यम से जरूरतमंद बच्चों और लोगों को नए-पुराने कपड़े वितरित किए जाते हैं। ‘वृक्षम’ अभियान के तहत पौधे तैयार कर स्कूली बच्चों और आम लोगों में वितरित किए जाते हैं, वृक्ष लगाए जाते हैं और उनकी देखभाल की जाती है। सीड बॉल्स के माध्यम से वन क्षेत्र बढ़ाने का प्रयास भी किया जा रहा है।

सरकारी विद्यालयों में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए ‘स्मार्ट क्लास रूम’ अभियान के तहत विभिन्न संस्थाओं और भामाशाहों के माध्यम से स्मार्ट टीवी, प्रोजेक्टर और साउंड सिस्टम पहुंचाए जा रहे हैं। ‘स्मार्ट खिलोना बैंक’ के तहत विभिन्न विद्यालयों में शैक्षिक तथा सहशैक्षिक खिलौने पहुंचाकर विद्यार्थियों के मानसिक विकास में मदद की जा रही है और टॉय बैंक स्थापित किए जा रहे हैं।

‘मिशन नवोदय तथा NNMS’ के तहत नवोदय व NMMS परीक्षा के लिए निशुल्क कोचिंग क्लास और सहायक सामग्री उपलब्ध कराकर बच्चों को नवोदय विद्यालय और NNMS छात्रवृत्ति के लिए प्रेरित किया जा रहा है। ‘अभियान दिव्यांगम’ के तहत ऐसे दिव्यांग विद्यार्थियों को विभिन्न भामाशाहों के माध्यम से व्हीलचेयर और वाकिंग स्टिक भेंट की जाती है, जो विद्यालय जाने में सक्षम नहीं हैं, ताकि उन्हें विद्यालय से जोड़ने का प्रयास किया जा सके।

‘अभियान संबलन’ के माध्यम से पढ़ाई छोड़ चुकी बालिकाओं और महिलाओं को निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं ‘वाटर फ़ॉर वॉइसलेस’ अभियान के तहत जीव दया के लिए पशुओं के लिए पानी की टंकियां रखवाने, बर्ड हाउस बांटने, परिण्डे लगाने और बीमार जानवरों की सेवा का कार्य किया जा रहा है।

“स्वयं का दर्द महसूस होना जीवित होने का प्रमाण है लेकिन औरों का दर्द महसूस होना इंसान होने का प्रमाण है”—इन्हीं पंक्तियों को अपने प्रयासों के माध्यम से चरितार्थ करते हुए अध्यापक नरेश कुमार लोहार पिछले 10 वर्षों से जनजाति क्षेत्र के जरूरतमंद विद्यालयों, विद्यार्थियों, लोगों और जीव-जंतुओं तक सहायता पहुंचाने की कड़ी को आगे बढ़ा रहे हैं।

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