तस्वीर में महिलाएं मंदिर के गर्भ गृह के सामने खड़े होकर पूजा-अर्चना कर रही हैं।

निचला खेरवाड़ा स्थित शीतला माता मंदिर में शीतला सप्तमी पर्व पर विविध धार्मिक कार्यक्रम आयोजित हुए। श्रद्धालुओं ने श्रद्धापूर्वक माता की पूजा-अर्चना की और पंक्तिबद्ध होकर दर्शन किए। मंदिर में महिलाओं की विशेष सहभागिता रही।

मंदिर के पुजारी मनोज जोशी ने बताया कि भाद्रपद (भादो) मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शीतला सप्तमी का व्रत रखा जाता है। यह व्रत आरोग्य, स्वच्छता और संक्रामक रोगों से रक्षा करने वाली मां शीतला को समर्पित है। भादो मास की सप्तमी का विशेष धार्मिक और साधक महत्व माना गया है।

स्कंद पुराण के अनुसार, भादो मास की शीतला सप्तमी पर माता शीतला चेचक, खसरा, फोड़े-फुंसी और अन्य संक्रमण या गर्मी से होने वाली बीमारियों से रक्षा करती हैं। इस व्रत को करने से घर-परिवार में आरोग्यता बनी रहती है। यह पर्व स्वच्छता और पर्यावरण शुद्धता का संदेश भी देता है।

शीतला सप्तमी पर ताजा गर्म खाना बनाने और खाने से परहेज किया जाता है। एक दिन पहले बनाए गए ठंडे पकवानों (बासोड़ा) का मां शीतला को भोग लगाया गया और परिवार द्वारा वही प्रसाद ग्रहण किया गया।

मंदिर में महिलाओं ने श्रद्धापूर्वक शीतला माता की पूजा-अर्चना की। इसके बाद पुजारी मनोज जोशी द्वारा कथा श्रवण कराया गया। श्रद्धालु पंक्तिबद्ध होकर माता के दर्शन करते रहे। इस दौरान धार्मिक आस्था के साथ पर्व की परंपराओं और स्वच्छता के संदेश को भी श्रद्धालुओं ने आत्मसात किया।

फोटो, पूजा अर्चना करती हुई महिलाएं

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