मीरा की भक्ति का उदाहरण देकर धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने बताया ईश्वर प्राप्ति का मार्ग, कबीर कथा में उमड़े श्रद्धालु
सुहालका भवन में काशी के कथाकार सुधाकर साहेब ने कबीर प्रसंगों की व्याख्या की और श्रद्धालुओं को मीरा जैसी अनन्य भक्ति अपनाने का संदेश दिया।
सुहालका भवन उदयपुर के मंच पर कथाकार सुधाकर साहेब को तस्वीर भेंट करते कबीर पंथी आयोजक दिख रहे हैं।
उदयपुर में कबीर संस्था की ओर से आयोजित सदगुरु कबीर चरितम कथा के पांचवें दिन सुहालका भवन में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। काशी के कथाकार एवं धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने कबीर साहेब के मार्मिक प्रसंगों की व्याख्या करते हुए भक्ति, सतनाम और ईश्वर प्राप्ति का संदेश दिया। उनकी निर्मल वाणी में कथा सुनकर कबीरपंथी श्रद्धालु ध्यानमग्न नजर आए। कथा के दौरान प्रस्तुत मधुर संगीत ने भी श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। वहीं, महिलाएं भक्ति रस में सराबोर होकर नृत्य का आनंद लेती रहीं।
कबीर संस्था उदयपुर के महासचिव कैलाश प्रजापत ने बताया कि सदगुरु कबीर चरितम कथा का आयोजन उदयपुर में पहली बार किया जा रहा है। पांचवें दिन भी बड़ी संख्या में कबीर भक्तों ने कथा और प्रवचन का श्रवण किया। कथा के बीच-बीच में मधुर संगीत की प्रस्तुतियों का श्रद्धालुओं ने आनंद लिया।
धर्माधिकारी सुधाकर साहेब ने अपने प्रवचन में कहा कि ईश्वर की भक्ति मीरा के समान होनी चाहिए। मीरा ने ईश्वर की प्राप्ति के लिए अनेक विकट परिस्थितियों का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी और अपने उद्देश्य को प्राप्त किया। इसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को दृढ़ निश्चय के साथ ईश्वर की भक्ति करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सतनाम ही मूल मंत्र है और ईश्वर कण-कण में व्याप्त हैं। परमात्मा प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में निवास करता है, यही सत्य है।
कथा के पांचवें दिन सतगुरु कबीर ज्ञानाश्रम, खेरादीवाडा के महंत तपसी दास साहेब, कबीर पंथ संस्था के अध्यक्ष भंवरलाल सुहालका, लोकेश चौधरी, बालचंद, रामप्रसाद, चंदन, गौरव (भीलवाड़ा), गजेंद्र, कैलाश प्रजापत, कमलेश चौहान, पिंटू, भूपेश, राजेश, भगवती लाल चौधरी और राम लाल चौधरी सहित सैकड़ों भक्त हंस जनों ने कथा प्रवचन का आनंद लिया। कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को मीरा की अटूट भक्ति, सतनाम के महत्व और प्रत्येक हृदय में परमात्मा के निवास का संदेश दिया गया।