खेरवाड़ा में बाबा कार्तिक उरांव की 102वीं जयंती मनाई, जनजाति समाज के अधिकारों और अस्मिता की रक्षा का लिया संकल्प
श्री हरि ओम जनजाति छात्रावास में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने बाबा कार्तिक उरांव के सामाजिक योगदान और धर्मांतरण विरोधी संघर्ष को याद किया।
श्री हरि ओम जनजाति छात्रावास खेरवाड़ा के हॉल में जमीन पर बैठे युवा और अतिथि दिख रहे हैं।
खेरवाड़ा स्थित श्री हरि ओम जनजाति छात्रावास में जनजाति समाज के प्रेरणास्रोत बाबा कार्तिक उरांव की 102वीं जयंती श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने उनके संघर्षपूर्ण जीवन, सामाजिक योगदान और जनजाति समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए किए गए प्रयासों को याद करते हुए उनके विचारों और अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम में खेरवाड़ा जिले के युवा प्रमुख नाथूलाल कलासुआ, जिला संपर्क प्रमुख सुभाष चंद्र रोत, जनजाति सुरक्षा मंच के प्रदेश संयोजक लालूराम कटारा और हीरालाल गरासिया अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस दौरान नाथूलाल कलासुआ ने बाबा कार्तिक उरांव के जीवन परिचय और जनजाति समाज के उत्थान के लिए किए गए उनके कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव जनजाति समाज के हितों के लिए सड़क से संसद तक संघर्ष करने वाले योद्धा थे। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जीवन में ऊंचाइयां हासिल कीं। वे जबरन धर्मांतरण के सख्त विरोधी थे और जनजाति समाज के अधिकारों एवं अस्मिता की रक्षा के लिए सदैव संघर्षरत रहे।
नाथूलाल कलासुआ ने कहा कि स्वर्गीय कार्तिक उरांव दूरदर्शी राजनेता और समाजसेवी थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में अनेक उल्लेखनीय कार्य किए और '20 वर्ष की काली रात' पुस्तक भी लिखी। वे जनजाति सुरक्षा मंच के प्रेरणास्रोत रहे। उनके विचारों, चिंतन और अधूरे सपनों को पूरा करने के लिए समाज सदैव संघर्षशील रहेगा।
उन्होंने जनजाति समाज के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक उत्थान के साथ सामाजिक न्याय की लड़ाई जारी रखने का संकल्प भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्तिक बाबू की जीवन गाथा का प्रत्येक अध्याय आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
कार्यक्रम में छात्रावास के अनेक युवा और विद्यार्थी उपस्थित रहे। अंत में सुभाष चंद्र फेरा ने सभी अतिथियों एवं उपस्थितजनों का आभार व्यक्त किया। समारोह में उपस्थित अतिथियों और युवाओं ने बाबा कार्तिक उरांव के योगदान को स्मरण किया।