उदयपुर के ऋषभदेव थाना पुलिस ने वर्ष 2019 के चर्चित कागदर माण्डवा हत्याकांड के बाद सामाजिक दबाव और भय के चलते 7 वर्षों से अपने ही गांव से विस्थापित जीवन जी रहे दो निर्दोष परिवारों को उनके पैतृक गांव में सुरक्षित पुनर्वास करवाया है। पुलिस प्रशासन की इस पहल से दोनों परिवारों को पूरे मान-सम्मान के साथ उनके पैतृक मकानों में वापस बसाया गया।

यह सफलता जिला पुलिस अधीक्षक उदयपुर डॉ. अमृता दुहन के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (खेरवाड़ा) रजत बिश्नोई एवं वृत्ताधिकारी (ऋषभदेव) अर्जुन सिंह के सुपरविजन में थानाधिकारी (ऋषभदेव) हेमंत अहारी के नेतृत्व में मिली।

वर्ष 2019 में गांव कागदर माण्डवा में हुए हत्याकांड के संबंध में थाना ऋषभदेव पर प्रकरण दर्ज किया गया था। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अभियुक्त नथूलाल, राजकुमार, पवन, विकेश, राजेन्द्र और नरेश मीणा के खिलाफ चालान पेश किया था। घटना के बाद उपजे सामाजिक तनाव और रंजिश के डर से अभियुक्तों के परिवार के सदस्य कालूलाल (पिता वेकलाराम मीणा) और स्व. कानजी (पिता वेकला मीणा) के परिवार बिना किसी आरोप के केवल डर और भय के माहौल के कारण अपने घर-बार छोड़कर पलायन कर गए थे। दोनों परिवार पिछले 7 वर्षों से दर-दर भटकने को मजबूर थे।

दोनों पीड़ित परिवारों की स्थिति को देखते हुए थानाधिकारी हेमंत अहारी ने विशेष पहल की। पुलिस प्रशासन ने तीन ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, मौतबीर लोगों, सरपंचों और प्रबुद्धजनों के साथ कई दौर की बैठकें आयोजित कीं। दोनों पक्षों को आमने-सामने बिठाकर वार्तालाप शुरू करवाया गया। लंबी समझाइश के बाद ग्रामीण इन निर्दोष परिवारों को वापस अपनाने के लिए सहर्ष तैयार हो गए।

पुलिस प्रशासन और ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से दोनों पीड़ित परिवारों को पूरे मान-सम्मान के साथ उनके पैतृक मकानों में गृह-प्रवेश करवाकर पुनर्वासित किया गया। गांव में वर्षों बाद दोनों पक्षों के बीच पुराना भाईचारा, सामाजिक सौहार्द और शांति का माहौल बना है। पुलिस की इस पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है और 7 वर्षों से विस्थापित परिवारों की सुरक्षित घर वापसी इस मामले का अहम मानवीय पहलू बनकर सामने आई है।

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